Bhogishail Parikrama: मारवाड़ का महाकुंभ माने जाने वाली जोधपुर की भोगिशैल परिक्रमा 25 मई से शुरू होने जा रही है। 25 से 31 मई तक, 7 दिन में हजारों श्रद्धालु शहर की करीब 110 किमी की यात्रा करेंगे। इस बार भीषण गर्मी की वजह से श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा अग्निपथ साबित होगी।
जोधपुर की भोगिशैल परिक्रमा, एक प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा है जो हिंदू पंचांग के अनुसार हर तीन साल में एक बार आने वाले अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के दौरान आयोजित की जाती है। इस यात्रा का पौराणिक महत्व है और बताया जाता है कि इस यात्रा को करने पर मथुरा और गोवर्धन की 21 और चौरासी कोस की परिक्रमा की तरह ही पुण्य प्राप्त होता है।
इस वर्ष 2026 में विक्रम संवत 2083 हिंदू नववर्ष 13 महीनों का है। इस बार दो ज्येष्ठ मास होने से अधिक मास रहेगा, जो 17 मई से 15 जून 2026 तक होगा।
आज से लगभग 100 साल पहले हिंदू सेवा मंडल के 50 कार्यकर्ताओं के साथ इस परिक्रमा की शुरुआत की गई। तब से लेकर अब तक इस सात दिवसीय पैदल यात्रा का संचालन हिंदू सेवा मंडल द्वारा किया जाता है। इस परिक्रमा में जिला प्रशासन के ३० से अधिक सरकारी विभाग के अलावा 60 से अधिक स्वयंसेवी संस्थाएं, भामाशाह और धार्मिक संगठनों का भी सहयोग रहेगा।
115 किलोमीटर की यात्रा में बड़ा हिस्सा कच्चा और पथरीला दी है जिस पर लोग पैदल चलेंगे। इस परिक्रमा में शहर के सभी वर्गों की भागीदारी होती है। जिससे श्रद्धालुओं को परिक्रमा के दौरान किसी तरह की कोई परेशानी न हो।
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सात दिन के सात पड़ाव
25 से 31 मई तक चलने वाली इस परिक्रमा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के भाग लेने की उम्मीद है। ३१ मई तक श्रद्धालु नाग पहाड़ियों के धार्मिक स्थलों की परिक्रमा करेंगे। इस परिक्रमा में 7 पड़ाव होंगे और अलग-अलग पड़ाव के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। हर पड़ाव पर यात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही है। उनके विश्राम के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए गए हैं।
25 मई को शाम 04:15 बजे, विधि-विधान से यात्रा ध्वज पूजा के साथ घंटाघर प्रांगण स्थित मंडल कार्यालय से परिक्रमा शुरू होगी। पहले दिन इस यात्रा का पड़ाव रातानाडा गणेश मंदिर रहता हैं। 7 दिनों तक हजारों श्रद्धालु परिक्रमा के रास्ते में आने वाले 54 से अधिक मंदिरों में धोक लगाएंगे।
विनायकिया में बिछडिय़ा गजानन व रातानाडा गणेश दर्शन के बाद प्रथम पड़ाव रातानाडा भाटी चौराहा क्षेत्र में रहता हैं। परिक्रमा 25 मई को अलसुबह रातानाडा गणेश मंदिर से रवाना होकर अपने द्वितीय पड़ाव स्थल चौपासनी पहुचती है।
श्रद्धालु घंटाघर से भाटी चौराहा, रिक्तियां भैरूजी, जलजोग, 12वीं रोड, मसूरिया बाबा रामदेव मंदिर, पाल लिंक रोड और जूना खेड़ापति मंदिर होते हुए चौपासनी का मार्ग लेते हैं। रातानाडा से चौपासनी मंदिर का सफर करीब 20 किमी का रहता हैं।
भोगिशैल परिक्रमा विश्राम स्थल
पहला पड़ाव – 25 मई 2026 – सोमवार – प्रथम ज्येष्ठ सुदी 10 – रातानाडा गणेश मंदिर, भाटी चौराहा
दूसरा पड़ाव – 26 मई 2026 – मंगलवार – प्रथम ज्येष्ठ सुदी 11 – चौपासनी श्याम मनोहर मंदिर
तीसरा पड़ाव – 27 मई 2026 – बुधवार – प्रथम ज्येष्ठ सुदी 11 – बड़ली भेरू जी मंदिर
चौथा पड़ाव – 28 मई 2026 – गुरुवार – प्रथम ज्येष्ठ सुदी 12 – बैधनाथ महादेव क्षेत्र
पांचवा पड़ाव – 29 मई 2026 – शुक्रवार – प्रथम ज्येष्ठ सुदी 13 – बेरीगंगा क्षेत्र
छठा पड़ाव – 30 मई 2026 – शनिवार – प्रथम ज्येष्ठ सुदी 14 – मंडोर उद्यान
सातवा पड़ाव – 31 मई 2026 – रविवार – प्रथम ज्येष्ठ पूर्णिमा – शहर गंगश्याम मंदिर, यात्रा पूर्ण
परिक्रमा के अंतिम पड़ाव मंडोर उद्यान के बाद परिक्रमा यात्री 31 मई को सुबह संतोषी माता मंदिर, कागा तीर्थ शीतला माता मंदिर, शेखावतजी का तालाब, उम्मेद भवन होते हुए रातानाडा गणेश मंदिर में दर्शन करते हैं । उसके बाद शोभायात्रा के रूप में कुंजबिहारी, गंगश्यामजी व घनश्यामजी मंदिर के दर्शन कर यात्रा घंटाघर मंडल कार्यालय पहुंचकर विसर्जित होती हैं ।
Jodhpur Bhogishail Parikrama Information
इस अद्भुत परिक्रमा के बारे में प्रमुख और विशिष्ट जानकारियां इस प्रकार हैं:
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 100 से अधिक वर्षों पुरानी यह परंपरा 1926 से हिंदू सेवा मंडल के संरक्षण में निरंतर जारी है।
- समय और अवधि: यह यात्रा आम तौर पर सात दिनों तक चलती है, जिसमें लगभग 110 किलोमीटर की पैदल परिक्रमा पूरी की जाती है।
- परिक्रमा का मार्ग: इस धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालु विभिन्न प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों (पड़ावों) पर जाते हैं। यात्रा मार्ग प्रकृति की गोद से होकर गुजरता है, और भक्त रास्ते में पड़ने वाले पेड़ों की पूजा करके पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लेते है।
- भागीदारी: इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेने के लिए किसी भी पूर्व पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) की आवश्यकता नहीं होती है। मारवाड़ के हजारों आम नागरिक और श्रद्धालु इस आस्था के उत्सव में स्वेच्छा से शामिल होते हैं।
- मूलभूत व्यवस्था : परिक्रमा के सफल और सुगम संचालन के लिए स्थानीय जिला प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और भामाशाहों द्वारा चिकित्सा, पेयजल, और मार्ग की मरम्मत जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।
पूर्व महारानी हेमलता राज्ये करेंगी परिक्रमा
मारवाड़ की परंपरागत भोगिशैल परिक्रमा 2026 में पूर्व महारानी हेमलता राज्ये भी शामिल होकर पैदल परिक्रमा करेंगी। यह राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मारवाड़ में सुख-शांति और जनकल्याण की भावना से जुड़ा आयोजन है।
इसमें जाति भेद को मिटाते हुए पूर्व राजघराने के स्लोगन ‘मैं थांसू दूर नहीं’ के संदेश को चरितार्थ करने का प्रयास करते हुए मारवाड़ की पूर्व महारानी सुख-समृद्धि, विश्व शांति और मंगल कामना करते हुए श्रद्धालुओं के साथ परिक्रमा पूरी करेंगी। सैनाचार्य अचलानंद गिरी महाराज ने बताया कि इस बार परिक्रमा के जरिए पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया जाएगा।
2012 में राजमाता कृष्णाकुमारी भी निजी वाहन में परिक्रमा में शामिल हुई थीं।
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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम
सोमवार को परिक्रमा मंडल पदाधिकारियों की जोधपुर कलेक्टर आलोक रंजन के साथ बैठक हुई। इसमें परिक्रमा मार्ग पर सड़क, लाइट, पानी, टेंट और कुंडों में जलापूर्ति सहित व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को गर्मी को देखते हुए व्यवस्थाएं सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सफाई, पेयजल, बिजली और चिकित्सा सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही टेंट व्यवस्था, मोबाइल टॉयलेट्स, सड़क मरम्मत और साइन बोर्ड्स लगाने पर भी फोकस किया गया है।
प्रशासन ने सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं, ताकि परिक्रमा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
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