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Jaya Ekadashi 2019: जया एकादशी व्रत कथा, पूजन विधि और महत्व

Jaya Ekadashi 2020: जानिए जया एकादशी व्रत कथा, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और जया एकादशी व्रत का महत्व। इस साल Jaya Ekadashi बुधवार 05 फरवरी को है।

Jaya Ekadashi 2019: माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते है, जो सभी पापों को हरने वाली सबसे उत्तम और पुण्यदायी एकादशी मानी गई है। इस साल Jaya Ekadashi 2019, शनिवार 16 फरवरी को है। हर मास में शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है और व्रती को मोक्ष प्राप्त होता है। जया एकादशी के दिन सर्वेश्वर भगवान विष्णु की खास पूजा-अर्चना की जाती है। जया एकादशी व्रत करने से ना केवल कष्ट दूर होता है, बल्कि नकारात्‍मक ऊर्जा से युक्त दिमाग को भी शांति मिलती है।

माना जाता है जया एकादशी का व्रत और भगवान श्रीविष्णु की विधिवत पूजा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्रती को भूत, प्रेत, पिशाच जैसी योनियों में नहीं भटकना पड़ता। जया एकादशी का व्रत करने से मनुष्यों को परम् मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी पर व्रत और पूजा पाठ करने से ब्रह्महत्या जैसे- पापों से भी मुक्ति मिलती है और हर कार्य में विजय मिलती है। यहां जानिए जया एकादशी व्रत का महत्व, पूजा विधि, व्रत कथा, पारण का समय और शुभ मुहूर्त के बारे में।

Jaya Ekadashi 2019 Date | जया एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त

जया एकादशी 16 फरवरी 2019, शनिवार को है.
जया एकादशी 2019 व्रत पारण मुहूर्त = सुबह 07:02 से 08:10 बजे तक (17 फरवरी 2019, रविवार को)

एकादशी आरंभ = 15 फरवरी 2019, शुक्रवार को दोपहर 01:18 बजे.
एकादशी समाप्त = 16 फरवरी 2019, शनिवार को सुबह 11:01 बजे.

जया एकादशी व्रत की पूजन विधि

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जया एकादशी व्रत कथा 

प्राचीन समय में नंदन वन में देव उत्सव चल रहा था. इस उत्सव में सभी देवता, सिद्ध संत और दिव्य पुरूष आये हुए थे। इस दौरान गंधर्वों में प्रसिद्ध पुष्पदंत और उसकी कन्या पुष्पवती, चित्रसेन और उसकी स्त्री मालिनी भी उपस्थित थे। उत्सव में गंधर्व गायन कर रहे थे और गंधर्व कन्याएं नृत्य प्रस्तुत कर रही थीं।

जब मालिनी का पुत्र पुष्पवान और उसका पुत्र माल्यवान गायन कर रहे थे, तभी पुष्पवती का नृत्य भी चल रहा था। इसी बीच पुष्यवती की नज़र जैसे ही माल्यवान पर पड़ी वह उस पर मोहित हो गई।

सभा की मर्यादा को भूलकर गंधर्व कन्या पुष्यवती ऐसा नृत्य करने लगी कि माल्यवान उसकी ओर आकर्षित हो गया। माल्यवान पुष्यवती की भाव-भंगिमा को देखकर सुध बुध खो बैठा जिससे सुर -ताल भूल गया और गायन की मर्यादा से भटक गया। इन दोनों की भूल पर इन्द्र देव को क्रोध आ गया और दोनों को नीच योनि मे जन्म लेने का श्राप दे दिया।

श्राप से तत्काल दोनों पिशाच बन गए और हिमालय पर्वत पर एक वृक्ष पर दोनों अत्यंत कष्ट भोगते हुए रहने लगे। दैव्ययोग से एक बार माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी के दिन दोनों अत्यंत दुखी होने के कारण केवल फलाहार पर रहकर ही दिन व्यतीत किया और सायंकाल के समय पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ गए। रात्रि ठंड के कारण दोनों की मृत्यु हो गयी।

लेकिन अनजाने में भी जया एकादशी का व्रत हो जाने से दोनों को पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई। माल्यवान और पुष्पवती पहले से भी सुन्दर हो गए और स्वर्ग लोक में उन्हें वापस स्थान मिल गया और आनन्द पूर्वक रहने लगे। इसके बाद से ही जया एकादशी व्रत करने की परंपरा की शुरुआत हुई है। जिस मनुष्य ने इस एकादशी का व्रत किया है उसने मानो सब यज्ञ, जप, दान आदि कर लिए।

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जया एकादशी व्रत का महत्व

माघ माह के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का महत्व शास्त्रों में धर्मराज युधिष्ठिर और भगवान श्री कृष्ण के बीच बातचीत के रूप में वर्णित है। पौराणिक मान्यतानुसार, जया एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को मृत्यु के पश्चात् नीच योनि, भूत, प्रेत, पिशाच योनि में भटकना नहीं पड़ता और सीधा मोक्ष प्राप्त कर बैकुंठ को जाता है। इस एकादशी को करने से ब्रह्म हत्यादि पापों से मुक्ति मिलती है। जया एकादशी का व्रत करने से घर की नकारात्‍मक ऊर्जा दूर होती है और परिवारजनों का स्वास्थ्य भी अच्‍छा रहता है। सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने से मन साफ़ होता है और सभी अधूरे कामो में सफलता मिलती है।

Jaya Ekadashi 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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(इस आलेख में दी गई Jaya Ekadashi 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

(Image Courtesy: youtube.com)

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