Suraj Rot ka Vrat: सुख-समृद्धि व शांति के लिए गणगौर पूजन करने वाली बालिकाओं एवं महिलाओं को सूरज रोट का व्रत रखना चाहिए। सूरज रोट का व्रत होली तथा गणगौर के व्रत (चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि) के बीच आने वाले रविवार को किया जाता है। इस साल Suraj Rot ka Vrat 2021, 11 अप्रैल को है। सूरज रोट के व्रत में सूरज भगवान का पूजन किया जाता है। इस व्रत को ‘होली पाछला रविवार‘ व ‘सूरज रोटे का व्रत‘ भी कहते हैं |
एक समय भोजन करके पूरे दिन निराहार रहते हैं। इस दौरान खेजड़ी की और धूप में खड़े होकर सूर्य भगवान की पूजा करनी चाहिये। ऐसा संभव ना हो तो सूर्य भगवान के चित्र की पूजा भी कर सकते हैं। पूजा कर सूरज भगवान व विनायक महाराज की कथा सुनी जाती हैं। भोजन में रोट खाते है जिसे झूठा नहीं छोड़ते। इस दिन नमक नहीं लिया जाता है। व्रत खोलने के लिए सूर्य छिपने से पहले भोजन किया जाता है।
सूरज रोट व्रत के पूजन की विधि व सामग्री, रोट बनाने की विधि तथा सूरज रोट व्रत का उद्यापन करने का तरीका ये सब जानने के लिए इस आलेख को पूरा पढ़िए।
क्यों किया जाता हैं सूरज रोट व्रत?
गणगौर पूजन करने वाली कन्याओं और महिलाओं के लिए सूरज रविवार का व्रत करना आवश्यक माना गया हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जों कोई इस सूरज रोटो रविवार का व्रत करता हैं वह अपने जीवन में सभी सुखों को प्राप्त करता हैं उसके जीवन में कभी किसी वस्तु का अभाव नहीं होता हैं।
बालिकाओं से लेकर विवाहिता महिलाएँ भाई की दीर्घायु व परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि की कामना के साथ रविवार को सूरज रोटे का उपवास रखती हैं।
सूरज रोट व्रत के पूजन की सामग्री
- रोली
- अक्षत (चावल)
- लच्छा (मोली)
- मेहंदी
- घेवर या हलवा और रोट
- जल का लोटा
- गंगाजल
- पुष्प
सूरज रोट बनाने की विधि
- सूरज रोट की पूजा के लिए रोट बनाने के लिए गेंहू के आटे में घी का मोयन डालकर आटा गूँथ ले। आटे में नमक ना डालें। यह रोट अलूना होता है।
- आटे को हाथ से मठार लें और थोड़ी मोटी रोटी बेल लें ।
- बेली हुई रोटी के चारों और अंगूठे व अनामिका अंगुली की सहायता से चूटी काटकर डिजाइन बना लें।
- यह रोटी सूरज जैसी दिखेगी।
- किसी गोल चीज (जैसे बोतल के ढक्कन) से रोटी के बीचो बीच काटकर गोल छेद बना लें।
- रोटी के इसी छेद में से देख कर सूरज भगवान की पूजा की जाती है।
- रोटी को तवे पर धीमी आंच पर दोनों तरफ से अच्छी तरह सेक लें ।
एक बार मे जितना खा सकते है उतना ही बड़ा रोट बनाना चाहिए क्योंकि रोट झूठा नहीं छोड़ा जाता है।
सूरज रोट व्रत के पूजन की विधि (Suraj Rot Vrat Pujan Vidhi)
- दो रोट बनाये जाते हैं एक पूजा के लिए और एक खाने के लिए। पूजा वाला रोट पूजा के बाद ब्राह्मणी को या गाय को दिया जाता है। दूसरा रोट खुद खाया जाता है।
- एक थाली में पूजा का सारा सामान रख ले। यदि होली पर दशामाता का डोरा लिया हो तो वह भी पूजा की थाली में रखें।
- सूर्य भगवान को जल और गंगाजल के छींटे दें। इसके बाद रोली, लच्छा, अक्षत, मेहंदी अर्पित करें।
- घेवर या हलवे का भोग अर्पित करें। रोट का भोग भी लगा सकते है लेकिन रोट टूटना नहीं चाहिए।
- व्रत करने वाली स्त्री बाये हाथ में रोट लेकर उसमें से सूरज को देखे और कोई दूसरी महिला सूरज की तरफ लोटे से थोड़ा थोड़ा जल छोड़ती जाए।
- जल छोड़ने वाली पूछे – “सखी – सखी सूरज जी दिख्या ” अर्थात – हे सखी , क्या सूर्य भगवान दिख रहे हैं ? व्रत करने वाली स्त्री जवाब में बोले – “सूरज जी दिख्या, दिख्या सो ही टूट्या” अर्थात – हाँ सखी, जैसे सुन्दर सूर्य भगवान दिख रखे हैं, वैसी ही हम पर कृपा करेंगे ।
- इस तरह सात बार जल छोड़ने वाली यह प्रश्न पूछे और हर बार व्रत करने वाली यही जवाब दे। सातों बार यह जवाब घेवर या रोट में से सूर्य भगवान को देखते हुए ही देने होते हैं।
- पानी से सूर्य को अध्र्य दे। इसके बाद सूर्य भगवान को धोक लगाकर प्रणाम करें।
- खेजड़ी पेड़ की पूजा अर्चना कर, रोली-मोळी बांधकर अपने भाई की दीर्घायु की कामना करे।
- अब आखे (गेँहू के कुछ दाने) हाथ में लेकर सूर्य भगवान की कहानी कहें या सुने।
- सूर्य अस्त से पूर्व उपवास का पारना करना चाहिए। मान्यता के अनुसार एक धान (आटे) से बने रोटे का चूरमा, घी शक्कर, दही व सब्जी का सेवन कर उपवास का पारना करना चाहिए।
सूरज रोट व्रत का उद्यापन
किसी भी व्रत का उद्यापन करने से आने वाले वर्षों में व्रत करने की अनिवार्यता समाप्त हो जाती है। इसे उजमन, उजाणा, उजमना या उजरना के नाम से भी जाना जाता है।
सूरज रोट के व्रत का उद्यापन जरुरी होता है क्योंकि इस उद्यापन के बाद ही गणगौर के व्रत का उद्यापन किया जा सकता है।
सूरज रोट के व्रत का उद्यापन भी होली और गणगौर के बीच वाले रविवार को ही किया जाता है। परिवार में परंपरा के अनुसार यह उद्यापन लड़की अपनी शादी से पहले भी कर सकती है और शादी के बाद भी। सूरज रोट का उद्यापन पीहर की तरफ से होता है।
सूरज रोट के व्रत उद्यापन विधि
इस व्रत के उद्यापन में आठ महिलाओं को भोजन कराया जाता है। भोजन में एक ही तरह का अनाज काम में लिया जाता है। पूड़ी या रोट परोसे जाते हैं। कोई भी रोट झूठा ना छोड़े इसका ध्यान रखना चाहिए।
सूरज रोट उद्यापन के लिए एक दिन पहले यानि शनिवार को हाथो मे मेंहंदी लगा लें। दूसरे दिन यानि रविवार को जिस दिन उद्यापन करना है, उस दिन सुबह सिर धोकर नहा लें और सुन्दर वस्त्र, गहने आदि धारण करके श्रृंगार करें। पूजा के लिए रोट बना कर तैयार कर लें।
रोट और पूजा की थाली के साथ ऊपर बताए अनुसार सूर्य भगवान की पूजा करें। सूर्य भगवान व विनायक महाराज की कहानी सुनें ।
इसके बाद आठ महिलाओं को भोजन करायें। भोजन में रोट या पुड़ी और सब्जी तथा इसके अलावा श्रद्धा के अनुसार भोजन बनाया जा सकता है। लेकिन कोई भोजन झूठा ना छोड़े खासकर पुड़ी या रोट।
महिलायें जब भोजन कर लें तो उन्हें टीका करें ,प्लेट (या कोई बर्तन) में रखकर बिंदी का पत्ता, साथ में श्रद्धानुसार रूपये ऊपर रखकर उपहार में दें। एक प्लेट में घेवर (या कोई मिठाई), बिंदी का पत्ता, रूपये रखकर सासु माँ को पैर छूकर दें।
साखिये को भोजन करायें। साखिया आपके उद्यापन का साक्षी होता है। साखिया घर का कोई भी लड़का या देवर हो सकता है। साखिया को टीका करके वस्त्र उपहार में दें और कान पकड़ कर बरु करायें। यानि उससे कहलवायें कि वह उद्यापन का साक्षी रहेगा। इस प्रकार उद्यापन संपन्न होता है।
!! जय सूर्य भगवान की !!
Suraj Rot Ka Vrat की हार्दिक शुभकामनाएं !!
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(इस आलेख में दी गई Suraj Rot Ka Vrat 2021 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)
