Third Navratri तीसरा नवरात्र का महत्‍व- माँ चंद्रघंटा Maa Chandraghanta को प्रसन्न करने का मंत्र, पूजा विधि, भोग व आरती
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तीसरा नवरात्र का महत्‍व- माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न करने का मंत्र, पूजा विधि, भोग व आरती

माँ दुर्गा की नौ शक्तियों की तीसरी स्वरूप माँ चंद्रघंटा की नवरात्री के तीसरे दिन अर्चना की जाती है| Maa Chandraghanta is worshipped on the third tithi (day) of Navratri that is on October 11, 2018माँ दुर्गा का तीसरा स्वरूप (अवतार) चंद्रघंटा हैं। अपने मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचन्द्र को धारण करने के कारण माँ “चंद्रघंटा” नाम से पुकारी जाती हैं। अपने वाहन सिंह पर सवार माँ चंद्रघंटा का यह स्वरुप युद्ध व दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है। माँ चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है| She is the married form of Goddess Parvati.

शांति और समृद्धि का प्रतीक मां चंद्रघंटा की तीन आंखें और दस हाथ हैं जो दस प्रकार के हथियार इत्यादि रखते हैं। Goddess Chandraghanta carries Trishul, Gada, Sword and Kamandal in her four left hands and keeps the fifth left hand in Varada Mudra. She carries lotus flower, Arrow, Dhanush and Japa Mala in her four right hands and keeps the fifth right hand in Abhaya Mudra.  वह न्याय स्थापित करती है और चुनौतियों से लड़ने के लिए अपने भक्तों को साहस और ताकत देती है।


मां आपको आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में भी मदद करती है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान सुनहरा और चमकीला है। यह वीरता और शक्ति का प्रतीक है। उनकी मूर्ति, जो सौंदर्य और बहादुरी दोनों का प्रतीक है, आपके जीवन से सभी नकारात्मक ऊर्जा एवं परेशानियों को पीछे छोड़ देती है।

मां की उपस्थिति शक्ति का स्रोत हो सकती है जो हमेशा बुरो और दुष्टों को मारने और दबाने में व्यस्त होती है। हालांकि, उनके भक्तों के लिए, मां शांत, सभ्य और शांतिपूर्ण है। माँ चंद्रघंटा की पूजा करके, आप मान-सम्मान, प्रसिद्धि और महिमा के लिए दरवाजे खोल सकते है।

मां चंद्रघंटा को खुश करने के लिए इस दिन भक्तों को भूरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इसके अलावा मां को दूध, खीर और शहद का भोग लगाना चाहिए।

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माँ चंद्रघंटा पूजा विधि

देवी चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए आपको सरल अनुष्ठानों का पालन करना होगा। आपको पहले सभी देवताओं, देवियों और ग्रहों की पूजा करनी चाहिए और फिर भगवान गणेश और कार्तिकेय और देवी सरस्वती, लक्ष्मी, विजया, जया – देवी दुर्गा के परिवार के सदस्यों को प्रार्थना की जानी चाहिए। भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा को दिल से प्रार्थना के बाद देवी चंद्रघंटा की पूजा करके निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

तीसरे दिन की पूजा में माता की चौकी पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें।

इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

नवरात्री के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की साधना कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले उपासक को संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान मिलता है| माता चंद्रघंटा की उपासना साधक को आध्यात्मिक एवं आत्मिक शक्ति प्रदान करती है|

माता चंद्रघंटा की पूजा उनके मंत्र और स्तुति का जप करते हुए अपने पसंदीदा फूल चमेली के साथ किया जाना चाहिए। पापों, शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं और भक्तों के जीवन मे अन्य परेशानियों को खत्म करने के लिए उनके आशीर्वाद शक्तिशाली हैं। वह शुक्र (Venus) ग्रह पर भी शासन करती है। इस दिन सिंधूर तृतीया भी मनाया जाता है।

मां चंद्रघंटा को भोग

मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और इसी का दान भी करें। ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं। इसमें भी मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाना श्रेयस्कर माना गया है।

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मां चंद्रघंटा की आरती

नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा का ध्यान।

मस्तक पर है अर्ध चन्द्र, मंद मंद मुस्कान॥

दस हाथों में अस्त्र शस्त्र रखे खडग संग बांद।

घंटे के शब्द से हरती दुष्ट के प्राण॥

सिंह वाहिनी दुर्गा का चमके सवर्ण शरीर।

करती विपदा शान्ति हरे भक्त की पीर॥

मधुर वाणी को बोल कर सब को देती ग्यान।

जितने देवी देवता सभी करें सम्मान॥

अपने शांत सवभाव से सबका करती ध्यान।

भव सागर में फसा हूँ मैं, करो मेरा कल्याण॥

नवरात्रों की माँ, कृपा कर दो माँ।

जय माँ चंद्रघंटा, जय माँ चंद्रघंटा॥

मां चंद्रघंटा मंत्र

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
(Om Devi Chandraghantayai Namah॥)

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

(Pindaja Pravararudha Chandakopastra kairyuta।
Prasadam Tanute Mahyam Chandraghanteti Vishruta॥)

माँ चंद्रघंटा स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
(Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Chandraghanta Rupena Samsthita।
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥)

माँ चंद्रघंटा की पूजा का महत्‍व 

नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है| चंद्रघंटा देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं. दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं. इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए.

माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण है. इनकी अराधना करने वाले में वीरता, निर्भयता के साथ-साथ सौम्यता और विनम्रता का संचार उसके मुख, नेत्र तथा सम्पूर्ण काया में कान्ति-गुण का विकास करता है. स्वर दिव्य हो जाता है एवं उसमें अलौकिक माधुर्य का वास होता है. इनके भक्त के आगमन से वातावरण में सुख-शांति का संचार होता है.

माँ चंद्रघंटा के साधक के शरीर से दिव्या प्रकाशयुक्त परमाणुओं का सतत विकरण होता रहता है जो साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देता है परन्तु आराधक एवं उसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति इसका अनुभव करते हैं.

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(Image Courtesy: YouTube)

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