Nirjala Ekadashi 2019: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुल्क पक्ष में पड़ने वाली एकदशी यानी निर्जला एकादशी का मह्त्व विशेष है. इस आलेख में हम निर्जला एकादशी व्रत का विधि विधान, भगवान विष्णु की पूजा विधि, निर्जला एकादशी का महत्व बताएंगे जिससे भक्तों ke जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार में शांति रहे।
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Nirjala Ekadashi 2019: निर्जला एकादशी व्रत विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व


Nirjala Ekadashi 2019: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुल्क पक्ष की एकादशी यानी निर्जला एकादशी का विशेष मह्त्व है। एक साल में होने वाली 24 एकदाशी में से, निर्जला एकादशी सबसे श्रेष्ठ और कठिन मानी जाती है। यह व्रत बिना पानी के रखा जाता है इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। निर्जला एकादशी पर पानी पिए बिना  भगवान विष्णु की पूर्ण विधि से पूजा-अर्चना की जाती है। निर्जला एकादशी का यह व्रत जीवन में जल की महत्वता को बताता है।

इस बार Nirjala Ekadashi 2019 व्रत, 13 जून गुरुवार को पड़ रही है। इस दिन जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की आराधना, पूर्ण विधि से व्रतदान-पुण्य से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिलती है, जीवन निरोग रहता है और सुख सौभाग्य की प्राप्ती होती है। हिंदू पुराणों के अनुसार महाराभारत काल में इस व्रत को भीम ने किया था, इस लिए निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी और पाण्डव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।


इस आलेख में हम निर्जला एकादशी बारे में बताएंगे की श्रद्धालु इस दिन किस विधि विधान से व्रत रखें, भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें, निर्जला एकादशी का क्या महत्व है और किस शुभ समय पूजा करें, जिससे भक्तों के जीवन में खुशियां बनी रहे और अक्षय पुण्य की प्राप्ति हो।

Nirjala Ekadashi 2019 शुभ मुहूर्त

निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त 12 जून 2019 बुधवार को शाम 6:27 से शुरू होगा। तो वहीं इस एकादशी की तिथि समाप्ति 13 जून को 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। जबकि इस व्रत के पारण का समय 14 जून को 2019 को सुबह 5:27 बजे से लेकर 8:13 बजे तक रहेगा।

एकादशी तिथि प्रारंभ:: 12 जून 2019 बुधवार को शाम 6:27
एकादशी  तिथि सामाप्: 13 जून 4:49 मिनट तक
पारण का समय: 14 जून को 2019 को सुबह 5:27 बजे से लेकर 8:13 बजे तक

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निर्जला एकादशी व्रत विधि

  • निर्जला एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में काफी महत्व माना जाता है इसलिए इस व्रत को पूरे यत्न मन के साथ करना चाहिए।
  • इस व्रत में प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु के सामने व्रत रखने का संकल्प करें।
  • निर्जला एकादशी व्रत के दिन के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जल और अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। आपके लिए ये संभव न हो तो फलों का रस, दूध, फलाहार का सेवन कर सकते हैं। अपने शक्ति के अनुसार व्रत किया जा सकता है।
  • इस शुभ दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने के साथ ही “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।  निर्जला एकादशी की कथा को पढ़ना और सुनना चाहिए और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु को प्रिय रंग पीला है। ऐसे में उन्हें पीले फल, पीले फूल, पीले पकवान आदि का भोग लगाएं।
  • भगवान विष्णु की पूजा करते समय उन्हें लाल फूलों की माला चढ़ाएं, धूप, दीप, नैवेध, फल अर्पित करके उनकी आरती करें।
  • तुलसी के पौधे व पीपल के पेड़ की पूजा करें, उन्हें जल चढ़ाएं,परिक्रमा करें और शाम में दीपक जलाएं।
  • सारी रात जगकर भगवान का भजन-कीर्तन करें और भगवान से किसी प्रकार हुई गलती के लिए क्षमा भी मांगे।
  • अगर निर्जला एकादशी का व्रत न भी कर पाएं तो इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करें।
  • एकादशी को धार्मिक आचरण रखना चाहिए। घर में शांति का वातावरण रखें। माता-पिता से आशीर्वाद लें और जीवन साथी का सम्मान करें।
  • द्वादशी वाले दिन सूर्यादय के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और अपने अनुसार उन्हे भेट और दक्षिणा देने के बाद खुद अन्न और जल ग्रहण करें।

निर्जला एकादशी व्रत के दिन कुछ विशेष चीजें दान करने से दुर्भाग्य दूर हो जाता है, जानिए क्या हैं वे चीजें?

  1. निर्जला एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, गौ, जल, शक्कर के ओलेशैय्या, सुन्दर आसन, पंखीछाता दान करना चाहिए।
  2. जरूरतमंद को खाना, वस्त्र, फल दान करने से भगवान विष्णु की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी।
  3. इस दिन नमक का दान करने से बुरा समय दूर हो जाता है। घर में भोजन की कमी कभी नहीं रहती।
  4. सुपात्र ब्राह्मण को जूता दान करने से स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।
  5. तिल का दान करने से शक्ति मिलती है अगर आप किसी लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं तो इससे भी आपको फायदा मिलेगा। वहीं मृत्यु का भय भी दूर हो जाता है।
  6. पुराने कपड़े का दान करने से आपको लंबी आयु मिलेगी। इसके साथ ही आपको रोगों से भी मुक्ति मिलेगी।
  7. अनाज का दान करने से आपके घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं होगी।
  8. मीठे जल का वितरण करना सर्वाधिक पुण्यकारी है।
  9. इस एकादशी पर जल का दान करें। मंदिर मे, ब्राह्मण को या किसी प्याऊ में मटकी का दान करें। अगर संभव हो सके तो किसी गौशाला में धन का दान करें।

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निर्जला एकादशी का महत्‍व

यह व्रत हमें जल संरक्षण का संदेश देता है। इस दिन विशेष रूप से जल का दान करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। पेय और खाद्य पदार्थों का दान भी कर सकते हैं। निर्जला एकादशी पर व्रत करने और दान पुण्य करने से जीवन में समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, वैभव और परिवार में शांति की प्राप्ति होती है। इस एकादशी का व्रत करने से अन्य तेईस एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाता है। इस दिन निर्जल व्रत जप-तप पूजा पाठ करने से प्राणी श्रीविष्णु का सानिध्य प्राप्त कर जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।

शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता कि अगर कोई पूरे साल की 23 एकदाशी में से एक का भी व्रत रख नहीं पाता है, और वह अगर निर्जला एकादशी का व्रत रखले तो उसे सभी एकादशियों का फल और पुण्य हासिल हो जाता है। साथ ही मनुष्य के परिवार पर भगवान विष्णु कृपा बरसती रहती है। जो लोग एकादशी का व्रत नहीं कर रहे हैं उन्‍हें भी इस दिन भगवान विष्‍णु का पूजन करना चाहिए।

Nirjala Ekadashi 2019 Vrat की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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(इस आलेख में दी गई Nirjala Ekadashi 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं।)

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