Padmini Ekadashi 2020, कमला एकादशी व्रत का पुण्य, जानिए पुरुषोत्तमी एकादशी व्रत कथा, महत्व और पारण का समय, पद्मिनी एकादशी व्रत पूजा विधि, Lord Vishnu puja vidhi
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Padmini Ekadashi 2020: मिलता है सालभर की सभी एकादशी व्रत का पुण्य; जानिए पुरुषोत्तमी एकादशी व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व और पारण का समय

Padmini Ekadashi 2020: तीन सालों में एक बार लगने वाले पुरुषोत्तम महीने (अधिक मास) के शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी, पुरुषोत्तमी एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। महाभारत में इसे सुमद्रा एकादशी कहा गया है। इसके अलावा इसे पद्मिनी एकादशी, कमला एकादशी भी कहा गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत-उपवास करने से ही हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। इस व्रत से सालभर की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है। इस वर्ष पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 सितंबर 2020 दिन रविवार को है

अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है. अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अधिक मास में पड़ने वाली एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि एकादशी का व्रत भी भगवान विष्णु को ही समर्पित है। जानिए Padmini Ekadashi 2020 Vrat Date, व्रत की पूजा विधिशुभ मुहुर्तव्रत का महत्व समेत सभी जानकारी।


Padmini Ekadashi 2020 kab hain?

पंचांग के अनुसार 26 सितंबर 2020 को दशमी की तिथि है. इस दिन दशमी की तिथि का समापन शाम 6 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है. इसके बाद ही एकादशी तिथि लग जाएगी. मान्यता कि जिस दिन से एकादशी तिथि का आरंभ होता है उसी दिन से इस व्रत की पूजा आरंभ हो जाती है.

एकादशी तिथि प्रारम्भ: 26 सितम्बर को शाम 06 बजकर 59 मिनट
एकादशी तिथि समाप्त: 27 सितम्बर को शाम 07 बजकर 46 मिनट
पद्मिनी एकादशी पारणा मुहूर्त: 28 सितंबर 2020 को प्रात: 06 बजकर 12 मिनट 41 सेकेंड से प्रात: 08 बजकर 26 मिनट 09 सेकेंड तक.

पद्मिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि

  1. एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करना चाहिए, तीर्थ स्नान न कर सकें तो घर में ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें डालकर नहा सकते हैं।
  2. पानी में तिल, कुश और आंवले का थोड़ा सा चूर्ण डालकर नहाना चाहिए।
  3. नहाने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल पर बैठकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु ki धूप, तुलसी के पत्तों, कपूर, दीप, भोग, फल, पंचामृत, फूल आदि से पूजा आरंभ करें।
  4. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ सूर्यदेव का भी विशेष पूजन अर्चन हो जाएगा। तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल का अर्घ्य दे। ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा एक साथ करने जीवन में कई परेशानियों का अंत होता है।
  5. भगवान के भजन या मंत्रों का पाठ करना चाहिए और कथा सुनें।
  6. भगवान को नैवेद्य लगाकर सब में बांट दें और ब्राह्मण भोजन करवाएं।
  7. एकादशी व्रत में विष्णु पुराण को पढ़ना और सुनना चाहिए
  8. पूरे दिन निराहार व्रत रखें। आप फलाहार कर सकते हैं।
  9. इस व्रत में रात्रि के समय भी भगवान विष्णु की पूजा का नियम है. इसलिए रात्रि में भजन और कीर्तन करना चाहिए.
  10. एकादशी व्रत का समापन यानि पारण भी नियम पूर्वक करना चाहिए तभी इस व्रत का पूर्ण लाभ और पुण्य प्राप्त होता है.
  11. व्रत के अगले दिन यानि द्वादशी तिथि (28 सितंबर, सोमवार) भगवान का पूजन कर ब्राह्मण को भोजन और दान देने का विधान बताया गया है।

इस एकादशी महत्व

ग्रंथों में इस व्रत को सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बताया गया है। ब्रह्मांड पुराण में कहा गया है कि मलमास की एकादशी पर उपवास और भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ ही नियम और संयम से रहने पर भगवान विष्णु खुश होते हैं। अन्य पुराणों में कहा गया है कि इस व्रत से बढ़कर कोई यज्ञ, तप या दान नहीं है। इस एकादशी का व्रत करने वाले इंसान को सभी तीर्थों और यज्ञों का फल मिल जाता है। जो इंसान इस एकादशी पर भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करता है, उसके जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। ऐसा इंसान हर तरह के सुख भोगकर भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है।

पद्म पुराण के अनुसार कमला एकादशी व्रत करने से साधक के सभी पापों का नाश तथा सभी भोग वस्तुओं की की प्राप्ति होती है। – इस महान व्रत के प्रभाव से देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और व्रती, मोक्ष तथा मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम प्राप्त करता है। – इस पुण्य व्रत को करने से मनुष्य के जन्म- जन्म के पाप भी उतर जाते हैं।

व्रत की कथा

पुराने समय में महिष्मती पुरी के राजा कृतवीर्य थे । कृतवीर्य की एक हजार ​पत्नियां थीं, लेकिन उनमें से किसी से भी कोई संतान न थी। राजा ने कई व्रत-उपवास और यज्ञ किए, लेकिन फायदा नहीं हुआ। इससे दुखी हो राजा जंगल में जाकर तपस्या करने का निर्णय लिया। कई साल तप में बीते, लेकिन उसे भगवान के दर्शन नहीं हुए।

तब उसकी एक रानी पद्मिनी ने अत्रि ऋषि की पत्नी सती अनुसूया से पुत्र पाने का उपाय पूछा। उन्होंने पुरुषोत्तमी एकादशी व्रत करने को कहा। राजा aur rani पद्मिनी ने पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत विधि विधान से किया।

इस व्रत को करने से भगवान विष्णु राजा के सामने प्रकट हुए और भगवान ने उसे पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। उस आशीर्वाद के कारण पद्मिनी के घर एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम कार्तवीर्य (सहस्त्रार्जुन )रखा गया। पूरे संसार में उनके जितना बलवान कोई न था।

भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा जो सुनते हैं, उनको बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

!! नारायण नारायण !!

Padmini Ekadashi 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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(इस आलेख में दी गई Padmini Ekadashi 2020 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं, हिंदू पांचांग और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है।)


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