क्यों मनाते हैं विजयदशमी विजय दशमी? बुराई पर सत्य, न्याय, अच्छाई की जीत का जश्न Dusshera 2018 Vijaydashmi Durga Dashmi
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क्यों मनाते हैं विजयदशमी? बुराई पर सत्य, न्याय, अच्छाई की जीत का पर्व


दशहरा हिंदुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। भारत में रहने वाले सभी हिंदू इस उत्सव को मनाते हैं। यह दिवाली से बीस दिन पहले मनाया जाता है। यह एक देवी त्यौहार है जो मां दुर्गा के सम्मान में मनाया जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाने का भी यह एक त्यौहार है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। विजयदशमी विभिन्न कारणों से मनाई जाती हैं और भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती हैं।

भारत के दक्षिणी, पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में विजयदशमी दुर्गा पूजा के अंत को चिह्नित करते हैं|उत्तरी और पश्चिमी राज्यों में, त्यौहार को समानार्थी रूप से दशहरा कहा जाता। इन क्षेत्रों में, यह “रामलीला” के अंत को चिह्नित करता है।


हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न तरीकों से दशरा मनाया जाता है।शारदीय नवरात्रि के समय नौ दिन मां दुर्गा का पूजन करने के बाद दसवें दिन रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है। यह त्यौहार ‘अश्विनी’ के महीने के पहले दिन, ‘अश्विनी  महीने के सुधा पाद्यमी दिन’ पर शुरू होता है और विजयदशमी दिवस पर 10 दिन तक चलता रहता है। मां देवी की पूजा दस अवतारों के रूप में की जाती है – 1. बाला 2. ललिता 3. अन्नपूर्णा 4. असवरुधा, 5. राजमाटंगा, 6. वाग्देविनी, 7. वाराही, 8. परास्की, 9 भुवनेश्वरी, और 10. चंडी।

उत्तर और पश्चिम  भारत में दशहरा, रावण पर राम की जीत का जश्न मनाने का त्यौहार है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत है। विजयदशमी दिवस पर सभी गांवों, कस्बों और शहरों में उत्सव दिखता है। बच्चे, पुरुष और महिलाएं नए कपड़े पहनते हैं, दुर्गा की प्रार्थना करते हैं, व्यंजन खाते हैं और शाम तक रामलीला मैदान तक पहुंचते हैं। रावण की बड़ी प्रतिमाएं, उनके भाई कुंभकर्ण और उनके पुत्र मेघनाथ का निर्माण किया जाता है। राम और लक्ष्मण द्वारा एक तरफ एक नकली लड़ाई लड़ी जाती है, और दूसरी तरफ राक्षसों की लड़ाई का नाट्य होता है।

राजस्थान में राजपूत उस दिन अपने हथियारों की पूजा करते हैं| व्यापारी वर्ग भी दशहरा के दिन ही किसी नई दुकान या शोरूम आदि का शुभारंभ करना शुभ मानते है। गुजरात में, देवी दुर्गा और भगवान राम दोनों को बुराई पर उनकी जीत के लिए पूजित किया जाता है। मंदिरों में भजन और प्रार्थना होते हैं। लोग गरबा और डांडिया नृत्य में बहुत ही उल्लास क साथ भाग लेते हैं|

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पूरब भारत  में दुर्गा पूजा का त्यौहार सबसे बड़ा त्यौहार होता है| यह पांच दिन तक मनाया जाता है | बलि चढाने की परंपरा भी इधर बहुत प्रचलित है | प्रमुख रूप से कोलकाता के कुमोरटुली नामक स्थान पर कलाकार मूर्तियों को आकार देते हैं। बंगाली मूर्तिकार द्वारा देवी दुर्गा के साथ लंबोदर गणेश, सरस्वती, लक्ष्मी और कार्तिकेय की भी मूर्तियां बनाई जाती हैं। देश के बहुत से प्रांतों में बंगाली मूर्तिकारों की बहुत मांग रहती है|दुर्गा पूजा के लिए कोलकाता में विशाल पंडाल सजाए जाते हैं। शहर और दूर गांवों से आकर शिल्पकार पंडालों का निर्माण करते हैं। इन भव्य पंडालों को बनाने में आने वाली लागत लाखों रुपए में होती है। विजयादशमी के दिन मूर्ति का विसर्जन होता है और औरतें लाल सिन्दूर दूसरी औरतों को लगाती हैं,जिसे सिन्दूर-खेला कहते हैं|

दक्षिण में ‘देवी नवरात्रि’ सभी मंदिरों में धूमधाम और पवित्रता के साथ मनाया जाता है। कांची कामक्षी, मदुरै मीनाक्षी, विजयवाड़ा के कनका दुर्गा, और श्रीशैलम के ब्रमरम्बा के मंदिर बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं। सातवें दिन सरस्वती पूजा की जाती है। सभी छात्र उस दिन ज्ञान की देवी से प्रार्थना करते हैं। नवमी दिवस पर सभी हथियारों और औजारों की सफाई और पूजा की जाती है। विजयदशमी दिवस को सभी नए उद्यम शुरू करने के लिए शुभ दिन माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि पांडवों ने अपने सभी हथियारों को ‘सामी पेड़‘ में छुपाया था जब वे विराट के राज्य में ‘अग्निवास’ कर रहे थे और उन्होंने सामी के पेड़ की पूजा करते हुए विजयदशमी दिवस पर अपने हथियारों को वापस ले लिया था । लोग सामी के पेड़ के पास जाते हैं और उसकी पूजा करते हैं.ऐसा करना वो लोग शुभ मानते हैं ।

दहन पुतलों का ही नहीं
बुरे विचारों का भी करना होगा
श्री राम का करके स्मरण
हर रावण से लड़ना होगा
Happy Dussehra 2018

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दशहरा की तिथि और शुभ मुहूर्त 

इस वर्ष दशमी की तिथि 18 अक्टूबर को 15:28 से लेकर 19 अक्टूबर 17:57 तक है | शामी पूजा ,अपराजिता पूजा ,सीमा अवलंघन जैसे कुछ ऐसे परंपरा है को की विजयदशमी के  दिन किए जाते हैं| ऐसी मान्यता है की यह परम्पर अपराह्न के वक़्त करनी चाहिए |(Source: NDTV)

विजय मुहूर्त = 14:05 to 14:51  (19 अक्टूबर)

अपराह्न पूजा मुहूर्त = 13:20 to 15:37 (19 अक्टूबर)

विजयदशमी का महत्‍व 

दशहरा का त्यौहार हमें काफी कुछ सीखाता है| बुराई कितनी भी शक्तिशाली हो, यह एक दिन खत्म हो जाएगी। अंत में सत्य, न्याय और भलाई  की ही जीत होती है। दशहरा का धार्मिक महत्‍व तो है ही लेकिन यह त्‍योहार आज भी बेहद प्रासंगिक है| यह पर्व बुराई पर अच्‍छाई का प्रतीक है| आज भी कई बुराइयों के रूप में रावण जिंदा है| जैसे मेघनाद,कुम्भकरण और रावण क पुतले जलाए जाते हैं, वैसे हमे भी अपने मैं की लालच, ईर्ष्या, स्वार्थीता, अन्याय, क्रूरता और अहंकार का अंत कर देना चाहिए |

यह त्‍योहार हमें हर साल याद दिलाता है कि हम बुराई रूपी रावण का नाश करके ही जीवन को बेहतर बना सकते हैं| महंगाई, भ्रष्‍टाचार, व्‍यभिचार, बेईमानी, हिंसा, भेदभाव, ईर्ष्‍या-द्वेष, पर्यावरण प्रदूषण, यौन हिंसा और यौन शोषण जैसी तमाम ऐसी बुराइयां हैं जो आज भी अपना अट्ठाहस कर मानवता और सभ्‍य समाज को चुनौती दे रही हैं| ऐसे में जरूरी है कि हम दशहरा के दिन इनको जड़ से खत्‍म करने का संकल्‍प लें, तभी हम सही मायनों में दशहरा की महत्ता को समझ पाएंगे|

दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत।

गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥

सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल।

बिना रुके चलते रहें, शूल बनेंगे फूल॥

क्रोध, कपट, कटुता, कलह, चुगली अत्याचार

दगा, द्वेष, अन्याय, छल, रावण का परिवार॥

राम चिरंतन चेतना, राम सनातन सत्य।

रावण वैर-विकार है, रावण है दुष्कृत्य॥

वर्तमान का दशानन, यानी भ्रष्टाचार।

दशहरा पर करें, हम इसका संहार॥

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