Surya Grahan 2019: इस 26 दिसंबर गुरुवार को वर्ष 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण पड़ने वाला है, जो की दशकों साल बाद एक बड़ा सूर्यग्रहण होगा। आपको यहां पर बता दें कि यह साल 2019 का तीसरा सूर्यग्रहण है, लेकिन पूर्ण सूर्यग्रहण के रूप में यह साल का पहला ग्रहण होगा। बताया जा रहा है कि यह अंगूठी जैसा सूर्य ग्रहण होगा जिसमें सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह लगेगा।
सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। सरल शब्दों में कहें तो जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य में आ जाता है जिससे सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाती हैं। इस घटना को ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
ज्योतिष नजरिये से 26 दिसंबर को होने वाला सूर्यग्रहण इस बार विशेष परिस्थितियों के साथ होगा क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के समय धनु राशि में एक साथ छह ग्रह (सूर्य, चन्द्रमा, शनि, बुध, बृहस्पति, केतु) का योग बनेगा जिससे इस सूर्यग्रहण का प्रभाव बहुत ज्यादा और लंबे समय तक रहने वाला होगा। ज्योतिषियों के अनुसार 26 दिसंबर को लगने वाला ग्रहण 57 साल पहले लगे ग्रहण जैसा प्रभावी होगा। इससे पहले ऐसी स्थिति साल 1962 में बनी थी, जब 7 ग्रह एक साथ थे।
Types of Solar Eclipse
तीन तरह होता है सूर्य ग्रहण –
- पूर्ण सूर्य ग्रहण – पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढ़क लेता है।
- खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण – खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण उसे कहते है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढ़क न सके। इसके खंड ग्रहण कहा जाता है।
- वलयाकार सूर्य ग्रहण – जब ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के किनारों से रोशनी का छल्ला बनता हुआ दिखाई दे तो इस प्रकार के ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण का योग हमेशा अमावस्या के दिन ही बनता है।
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सूर्य ग्रहण और सूतक का समय (Surya Grahan 2019 Date and Timing)
सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 08 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा, सुबह 09 बजकर 37 मिनट पर ग्रहण का मध्यकाल और सुबह 10 बजकर 57 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष (समाप्त) हो जाएगा। खण्डग्रास की अवधि 2 घंटे 40 मिनट तक रहेगी।
जोधपुर मे सुर्य ग्रहण सुबह 08 बजकर 09 मिनट बजे शुरू होगा, जिसका मोक्ष सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। अलग अलग शहरों के हिसाब से सूर्य ग्रहण के शुरू और खत्म होने के समय में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है।
सूर्य ग्रहण का सूतक, ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले यानि 25 दिसंबर को शाम 8 बजकर 17 मिनट में प्रभावी होगा जो ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होगा। इस ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। धार्मिक दृष्टि से सूतक काल को किसी शुभ कार्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों को नहीं किया जाता है।
सूर्य ग्रहण का दृश्य क्षेत्र
साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण सम्पूर्ण भारत के साथ ही नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्यांमार, अफग़ानिस्तान सहित एशिया महाद्वीप के अन्य देशों, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के देशों में देखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों की मानें तो दक्षिण भारत में यह सबसे बेहतर तरीके से दिखाई देगा।
ग्रहण का प्रभाव || Effects of Surya Grahan
ज्योतिषियों के अनुसार, ये सूर्य ग्रहण धनु राशि और मूल नक्षत्र में बनेगा इसलिए व्यक्तिगत रूप से धनु राशि और मूल नक्षत्र में जन्मे लोगों पर इस ग्रहण का विशेष प्रभाव पड़ेगा।
ग्रहण के दिन मूल नक्षत्र में चार ग्रह रहेंगे। वहीं, धनु राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु रहेंगे। इन छह ग्रहों पर राहु की पूर्ण दृष्टि भी रहेगी। इनमें दो ग्रह यानी बुध और गुरु अस्त रहेंगे। कर्क, तुला, कुंभ और मीन चार राशि वालों पर ग्रहण शुभ रहेगा।
ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण से ठीक एक दिन पहले पौष माह में मंगल वृश्चिक में प्रवेश करने वाला है। यह स्थिति बड़े प्राकृतिक आपदा की ओर इशारा कर रही है। इस ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, ग्रहण के 3 से 15 दिनों के भीतर भूकंप, सुनामी और अत्यधिक बर्फबारी हो सकती है।
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सूर्य ग्रहण में भूलकर भी न करें ये काम
आइए जानते हैं धार्मिक मान्यता अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान आपको किन चीजों का परहेज करना है-
- कुंडली में दोष हो तो ग्रहण के समय व्याक्ति को बाहर नहीं निकलना चाहिए, खासकर जिनकी राशि में राहु-केतु का प्रभाव ज्यादा हो।
- ग्रहण की अवधि में शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए, ऐसा करने से आपके घर की सुख-शांति तबाह हो सकती है।
- सूर्य ग्रहण के दौरान और सूतक लगने के बाद शुभ कार्य भी नहीं किए जाने चाहिए।
- ग्रहण के समय तेल मालिश नहीं करनी चाहिए, ऐसा करने से त्वचा संबंधी परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है।
- सूर्य ग्रहण में तुलसी की पत्तियों का भी बड़ा महत्व होता है, इस अवधि में तुलसी को पत्ते को तोड़ना या काटना अशुभ माना जाता है।
- सूर्य ग्रहण की अवधि में भोजन पकाने व खाने की मनाही होती है. मदिरा-पान या मांस-मछली खाना बहुत अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान जरूरत पड़ने पर बीमार या बच्चे केवल उन्हीं खानों का इस्तेाल कर सकते हैं जिस पर तुलसी पत्ता पहले से रखा गया हो।
- मशीनों का उपयोग और देवी-देवताओं की प्रतिमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद रहते हैं।
- ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा रहता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान गर्भवति महिलाओं को सब्जी काटने, कपड़े सिलना या किसी भी नुकीली चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि इससे गर्भ में पल पहे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है और वह पूर्ण विकसीत नहीं हो पाता है।
- ग्रहण काल खत्म होने के बाद गर्भवति महिलाओं को स्नान जरूर करना चाहिए, ऐसा न करने से बच्चों को त्वचा संबंधी रोग हो सकता है।
सूतक काल का रखें ख्याल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए सूतक काल को से पहले खाने पीने की चीजों में तुलसी की पत्तियां डाल कर रखनी चाहिए, जिससे ये दूषित न हो सकें। वहीं, तुलसी के पत्तों को भी सूतक काल शुरू होने से पहले ही तोड़ कर रख लें।
ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के समय सिर्फ भगवान का नाम लेना चाहिए। आप चाहें तो दान या कुछ धार्मिक कार्य भी कर सकते हैं। अपने पूजा स्थान को कपड़े से ढ़ककर रखें। सूर्य ग्रहण से बचने के लिए सभी राशियों के लोगों को भगवान शिव का जाप करना चाहिए। फिर शिव चालीसा का जाप करना चाहिए। इस दौरान तुलसी पत्ता खाना भी अच्छा होता है।
साथ ही ग्रहण खत्म होने के बाद नहाकर गंगा जल से पूरे घर में छिड़काव करना चाहिए। फिर पूजा-पाठ कर दान-दक्षिणा देने का विधान है। ग्रहण के दौरान आटा, चावल, चीनी, सफेद कपड़े, मूंग की दाल, साबूत उड़द, काले उड़द, काला तिल और काले वस्त्र किसी जरूरतमंद को दान करने चाहिए।
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(इस आलेख में दी गई Surya Grahan 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं, वैज्ञानिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)




