Ganesh Chaturthi 2019, Ganesh Prasad, Ganesh Pujan Vidhi, गणेश चतुर्थी: जानिए पूजन विधि, राशि के अनुसार गणेश भोग, श्री गणेश द्वादश नामवली। जानिए श्री गणेश जी की पूजन-अर्चन विधि, आपकी राशि के अनुसार भोग (प्रसाद) और गणेश जी के बारे मे कुछ विशेष तथ्य। भगवान गणेश के जन्मोत्सव भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 2 सितंबर को है।
Culture Dharamik Dharmik

गणेश चतुर्थी: जानिए पूजन विधि, राशि के अनुसार गणेश भोग, श्री गणेश द्वादश नामवली


गणेश चतुर्थी का यह उत्सव लगभग दस दिनों तक चलता है जिस कारण इसे गणेशोत्सव भी कहा जाता है। दो सितंबर गणेश चतुर्थी को  भक्‍त लोग भगवान गणेश की मूर्ति स्थापति कर अगले 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाएंगे। फिर 10वें दिन यानी कि अनंत चतर्दशी (भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी) को भगवान गणपति प्रतिमा को जल में विसर्जन के साथ मंगलमूर्ति को विदाई जाती है।

Ganesh Chaturthi is a ten-day festival to celebrate Lord Ganesha’s birthdayभगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में हर साल हिन्दू पंचाग के भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी, 2 सितंबर (सोमवार) को है।


भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से यह उत्सव गणपति प्रतिमा की स्थापना कर उनकी पूजा से आरंभ होता है और लगातार दस दिनों तक (भाद्रपद चतुर्दशी तक) गणेशजी की विशेष आराधना, भोग (प्रसाद) और पूजन किया जाता हैं। जानिए बल, बुद्धि और सौभाग्य के देवता श्री गणेश जी की पूजन-अर्चन विधि, आपकी राशि के अनुसार भोग (प्रसाद) और गणेश जी के बारे मे कुछ विशेष तथ्यविघ्नों के हरने वाले देवता प्रथम पूज्य पार्वतीपुत्र, शिवपुत्र, गजानन की आराधना जो भक्त विधिपूर्वक करता है, उसको आने वाले विघ्नों से मुक्ति मिल जाती है।

गणेश चतुर्थी की पूजन विधि

गणपति की इस तरह विधि विधान से भाव पूर्ण  पूजा करे:

  • गणपति की स्‍थापना करने से पहले स्‍नान कर नए (स्वच्छ, साफ धुले हुए) वस्‍त्र पहनने चाहिए। इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं।
  • घी का दीपक जलाएं, इसके बाद पूजा का संकल्‍प लें।
  • इसके बाद गणपति को दूर्वा या पान के पत्ते की सहायता से स्‍नान कराएं। सबसे पहले स्वच्छ जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्‍नान कराएं।
  • अब गणेश जी को पीले वस्‍त्र चढ़ाएं, अगर वस्‍त्र नहीं हैं तो आप उन्‍हें मोली को वस्त्र मानकर अर्पित कर सकते है।
  • इसके बाद गणपति को सिंदूर (कुमकुम), चंदन, अक्षत लगाएं, फूल चढ़ाएं और फूलों की माला अर्पित करें और आभूषण से अलंकृत करें।
  • अब बप्‍पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं।
  • अब नैवेद्य का भोग लगाएं, नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़, नारियल और फल शामिल हैं। मोदक और बूंदी के लड्डू गणेश जी को अति प्रिय हैं, उनका भोग अवश्य लगाएं।
  • पान, लौंग इलायची और द्रव्य चढ़ाएं, उसके पश्चात् ऋतु फल अर्पित करें।
  • इसके बाद गणपति को दक्षिणा प्रदान करें।
  • अब अपने परिवार के साथ गणपति की और शंकर जी आरती करें।
  • इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्‍पांजलि अर्पित करें।
  • अब गणपति की परिक्रमा करें। गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करने का विधान है। मतान्तर से गणेश जी की तीन परिक्रमा भी की जाती है।
  • इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
  • पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।
  • ध्यान रहे कि तुलसी पत्र गणेश पूजा में इस्तेमाल नहीं हों। तुलसी को छोड़कर बाकी सब पत्र-पुष्प गणेश जी को प्रिय हैं।

READ TooGanesh Chaturthi 2019: श्री गणेश स्‍थापना व पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, जन्‍म कथा और महत्‍व

गणेश जी के बारे मे कुछ विशेष तथ्य

  1. सभी देवताओं में सबसे पहला स्थान गणेश जी का ही है।
  2. किसी भी देव की आराधना के आरम्भ में, किसी भी सत्कर्मअनुष्ठान में, उत्तम-से-उत्तम और साधारण-से-साधारण कार्य में भी भगवान गणपति का स्मरण, उनका विधिवत पूजन किया जाता है। इनकी पूजा के बिना कोई भी मांगलिक कार्य शुरु नहीं किया जाता है। यहाँ तक की किसी भी कार्यारम्भ के लिए ‘श्री गणेश’ एक मुहावरा बन गया है।
  3. महादेव, भगवान विष्णु, माता दुर्गा, सूर्यदेव के साथ-साथ गणेश जी का नाम हिन्दू धर्म के पाँच प्रमुख देवों (पंच-देव) में शामिल है।
  4. गण’ का अर्थ है – वर्ग, समूह, समुदाय और ‘ईश’ का अर्थ है – स्वामी। शिवगणों और देवगणों के स्वामी होने के कारण इन्हें ‘गणेश’ कहते हैं।
  5. भगवान शिव को गणेश जी के पिता, पार्वती जी को माता, कार्तिकेय (षडानन) को भ्राता, ऋद्धि-सिद्धि (प्रजापति विश्वकर्मा की कन्याएँ) को पत्नियाँ, क्षेम (शुभ)लाभ को गणेश जी का पुत्र माना गया है।
  6. श्री गणेश जी के बारह प्रसिद्ध नाम शास्त्रों में बताए गए हैं, जिनको श्री गणेश द्वादश नामवली भी कहते हैं ; जो इस प्रकार हैं: 1. सुमुख, 2. एकदंत, 3. कपिल, 4. गजकर्ण, 5. लम्बोदर, 6. विकट, 7. विघ्नविनाशन, 8. विनायक, 9. धूम्रकेतु, 10. गणाध्यक्ष, 11. भालचंद्र, 12. गजानन
  7. गणेश जी ने महाभारत का लेखन-कार्य भी किया था। ब्रह्मा जी के कहने पर वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना का लेखन-कार्य गणेश जी से करवाया जाए।
  8. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ‘’ को साक्षात गणेश जी का स्वरुप माना गया है। जिस प्रकार प्रत्येक मंगल कार्य से पहले गणेश-पूजन होता है, उसी प्रकार प्रत्येक मन्त्र से पहले ‘ॐ’ लगाने से उस मन्त्र का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
  9. भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक, मंगलकारी, रक्षाकारक, सिद्धिदायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान प्रदायक माना गया है।
  10. प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को “संकष्टी गणेश चतुर्थी” व शुक्लपक्ष की चतुर्थी को “वैनायकी गणेश चतुर्थी” मनाई जाती है।अगर मंगलवार को गणेश चतुर्थी आए तो उसे अंगारक चतुर्थी कहते हैं। जिसमें पूजा व व्रत करने से अनेक पापों का शमन होता है। अगर रविवार को यह चतुर्थी पड़े तो भी बहुत शुभश्रेष्ठ फलदायी मानी गई है।

READ ALSO: Baba Ramdev Jayanti 2019: रामसा पीर के जन्म की कथा, परचा, पीर बनने का रहस्य

आपकी राशि के अनुसार श्री गणेश का भोग (प्रसाद)

तो चलिए जानते हैं गणेशोत्सव पर गणपित को किस राशि के जातकों को क्या भोग लगाना चाहिए, जिससे उनको प्रभु गणेश की कृपा, आशीर्वाद मिलेगा और साथ ही संकट से भी दूर रहेंगे।

मेष राशि – मेष राशि के भक्तो को लड्डू का भोग लगाना चाहिए।

वृष राशि – वृष राशि के लोगों को नारियल, मीठा और लड्डू का भोग लगाना चाहिए।

मिथुन राशि – मिथुन राशि के जातकों को लड्डू के साथ किसी मीठी चीज का भोग लगाना चाहिए। इससे आपको नौकरी में फायदा होगा, Promotions के चांस बढ़ेंगे।

कर्क राशि – कर्क राशि के जातकों को इस दिन लड्डू के साथ खीर का भोग लगाना चाहिए।

सिंह राशि – सिंह राशि के जातकों को भगवान गणेश को लड्डू और गुड़ के मोदक का भोग लगाना चाहिए।

कन्या राशि – कन्या राशि के जातकों को लड्डू और फल का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपके मन को काफी शांति मिलेगी।

तुला राशि – तुला राशि के जातकों को भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाना चाहिए।

वृश्चिक राशि – वृश्चिक राशि के जातकों को गुड़ के लड्डू का भोग आवश्य लगाना चाहिए।

धनु राशि – धुन राशि के जातकों को खीर और मीठे का भोग लगाना चाहिए, इससे आपका पढ़ाई में मन लगेगा।

मकर राशि – मकर राशि के लोगों को तिल के लड्डू का भोग लगाना चाहिए।

कुंभ राशि – कुंभ राशि के जातकों को खीर का भोग लगाना चाहिए।

मीन राशि – मीन राशि के लोगों को लड्डू, बादाम खीर को भोग लगाना चाहिए।

READ MORE: Bachh Baaras 2019: बछ बारस महत्व, पूजा विधि, पूजन की सामग्री और कथा

मूषिकवाहन मोदकहस्त

चामरकर्ण विलम्बितसूत्र

वामनरूप महेस्वरपुत्र

विघ्नविनायक पाद नमस्ते

इस लेख के साथ हम आशा करते हैं कि गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर भगवान श्री गणेश की कृपाबनी रहे आप हर दम; हर कार्य में सफलता मिले, जीवन में आये कोई विघ्न||

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं !!

“बोलो गणपति बप्पा मोर्या “

Connect with us through Facebook for all latest updates of Hindu Tradition, Fasts & Festivals and Culture. Do comment below for any more information or query on Ganesh Chaturthi 2019गणेश चतुर्थी पूजन विधिगणेश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त ऐवम विधि, भगवान गणेश की जन्‍म कथा, गणेश चतुर्थी का महत्‍व इत्यादि and also let us know, how you celebrated.

(इस आलेख में दी गई गणेश चतुर्थी 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं, हिंदू पांचांग और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है।)

About the author


Leave a Reply