Ganesh Chaturthi 2019: गणेश चतुर्थी, भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है, इस साल यह त्योहार 2 September को मनाया जाएगा। गणेश चतुर्थी, श्री गणेश जयंती, विनायक चतुर्थी, कलंक चतुर्थी, डण्डा चौथ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
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Ganesh Chaturthi 2019: श्री गणेश स्‍थापना व पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, जन्‍म कथा और महत्‍व


Ganesh Chaturthi 2019: गणेश चतुर्थी, एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है जो भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश सभी बाधाओं का निवारण करने वाले देव माने जाते हैं। भगवान गणेश देवताओं में प्रथम पूज्य हैं, वे ज्ञान, बल, बुद्धि और सौभाग्य के देवता हैं। Ganesh Chaturthi 2019, 2 सितंबर (सोमवार) को मनाया जाएगा।

गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह चतुर्थी मुख्य रूप से गणेश चतुर्थीश्री गणेश जयंती, विनायक चतुर्थी कहलाती है। Bhadrapad मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन मिथ्या कलंक देने वाला होता है, इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन करना मना होता है। इस चतुर्थी को कलंक चौथ (कलंक चतुर्थी) के नाम से भी जाना जाता है। लोक परम्परानुसार इसे डण्डा चौथ भी कहा जाता है।


10 दिन तक चलने वाला यह गणेश चतुर्थी उत्‍सव, 2 सितंबर (सोमवार) से प्रारंभ होकर अनंत चतुर्दशी के दिन तक मनाया जाता हैं। दो सितंबर को भक्‍त लोग प्‍यारे बप्‍पा (Ganpati Bappa) की मूर्ति को स्थापति कर अगले 10 दिन तक उनकी पूजा कर गणेश उत्सव मनाएंगे। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (अनंत चतर्दशी) को ढोल नगाड़े बजाते हुए, नाचते गाते हुए गणेश प्रतिमा को जल में विसर्जन के लिये ले जाया जाता है। विसर्जन के साथ मंगलमूर्ति भगवान गणेश को विदाई दी जाती है। साथ ही उनसे अगले बरस जल्‍दी आने का वादा भी लिया जाता है। विसर्जन के साथ ही गणेशोत्सव की समाप्ति होती है।

गणेश चतुर्थी को भगवान गणेशजी की स्थापना विशेष मुहूर्त में करनी चाहिए। अगर इस दिन पूजा सही समय और मुहूर्त पर विधिपूर्वक की जाए तो हर मनोकामना की पूर्ति होता है। भगवान गणेश का धूप, दीप, नैवेद्य, मोदक, दूर्वा, नीलकंठी के पुष्प से द्वादश (बारह) गणेश नामावली से पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है।

जानिए Ganesh Chaturthi 2019 Dateपूजा विधिगणेश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त, भगवान गणेश की जन्‍म कथा, गणेश चतुर्थी का महत्‍व, गणेश स्‍थापना विधि  समेत सभी जानकारी।

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Ganesh Chaturthi 2019 Shubh Muhurat

गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल पक्ष के चतुर्थी) 2 सितंबर 2019 दिन सोमवार

चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 02 सितंबर 2019 को 4 बजकर 56 मिनट
चतुर्थी तिथि समाप्त: 03 सितंबर 2019 को 01 बजकर 53 मिनट

मान्यता है कि गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था। चतुर्थी के दिन मध्याह्न 12 बजे का समय गणेश-पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है.

गणेश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त : 11:04:28 से 13:37:02 तक,  अवधि : 2 घंटे 32 मिनट

चौघड़िया अनुसार

अमृत चौघड़िया – प्रात: 6.10 से 7.44 तक
शुभ चौघड़िया – सुबह 9.18 से 10.53 तक
लाभ चौघड़िया – दोपहर 3.35 से 5.09 तक
अमृत चौघड़िया – शाम 5.09 से 6.53 तक

देर रात मुहूर्त- रात्रि 11.01 से 12.27 तक।

समय जब चन्द्र दर्शन नहीं करना है: सुबह 08 बजकर 54 मिनट से रात 09 बजकर 05 मिनट तक

गणेश स्‍थापना विधि

गणपति को घर में स्थापित करने से पहले पूजा स्थल की सफाई करें। गणपति की स्‍थापना करने से पहले स्‍नान कर नए (या साफ धुले हुए) वस्‍त्र पहनने चाहिए। इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं।

एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर अक्षत (चावल) या गेहूं, मूंग, ज्‍वार रखें और गणपति (सोने, तांबे, मिट्टी की गणेश प्रतिमा) को स्थापित करें। आप चाहे तो बाजार से खरीदकर या अपने हाथ से बनी गणपति बप्‍पा की मूर्ति स्‍थापित कर सकते हैं। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्‍वरूप एक-एक सुपारी रखें। जल से भरा हुआ कलश के मुंह पर कोरा वस्त्र बांधकर गणेश जी के बाएं रखें। कलश पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें।

घी का दीपक जलाएं, इसके बाद पूजा का संकल्‍प लें। फिर गणेश जी का ध्‍यान करने के बाद उनका आह्वन करें। गणेश जी के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखें। गणेश जी को सिंदूरदूर्वा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बाँट दें।

सांयकाल के समय गणेश जी का पूजन करना चाहिए। गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चालीसाआरती करने के बाद अपनी दृष्टि को नीचे रखते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

गणेश स्‍थापना – ध्यान रखें

  • आसन कटा-फटा नहीं होना चाहिए। पत्‍थर के आसन का इस्‍तेमाल करें।
  • गणेश जी का जन्म मध्याह्न में हुआ था, इसलिए मध्याह्न में ही प्रतिष्ठापित करें।
  • 10 दिन तक नियमित समय पर आरती करें।
  • पूजा का समय नियत रखें। जाप माला की संख्या भी नियत ही रखें।
  • गणेश जी के सम्मुख बैठकर उनसे संवाद करें। मंत्रों का जाप करें। अपने कष्ट कहें।
  • शिव परिवार की आराधना अवश्य करें।
  • ध्यान रहे कि तुलसी के पत्ते (तुलसी पत्र) गणेश पूजा में इस्तेमाल नहीं हों। तुलसी को छोड़कर बाकी सब पत्र-पुष्प गणेश जी को प्रिय हैं।

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भगवान गणेश की जन्‍म कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने एक बार भगवान शिव के गण नंदी के द्वारा उनकी आज्ञा पालन में त्रुटि के कारण उदास थी। पार्वती जी स्नान करने के लिए जा रही थीं तो उन्होंने अपने शरीर के मैल और उबटन से एक पुतला निर्मित कर उसमें प्राण फूंके और कहा, “तुम मेरे पुत्र हो, तुम मेरी ही आज्ञा का पालन करना और किसी की नहीं। हे पुत्र! मैं स्नान के लिए जा रही हूं, कोई भी भवन के अंदर न आने पाए।” कुछ देर बाद वहां भगवान शंकर आए और माँ पार्वती के भवन में प्रवेश करने लगे। यह देखकर उस बालक ने उन्हें रोका, बालक हठ देख कर भगवान शंकर क्रोधित हो गए। इसे उन्होंने अपना अपमान समझा और अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर भीतर चले गए।

जब देवी पार्वती को इसका पता चला तो वह इस दुःख से क्रोधित हो विलाप करने लगीं। उनकी क्रोधाग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब सभी देवताओं ने मिलकर उनकी स्तुति की और बालक को पुनर्जीवित करने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करने लगे। तब देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव के कहने पर विष्णु जी एक हाथी (गज) के बच्चे का सिर काट कर लाए और भगवान शिव ने वह सिर उस बालक के धड़ पर रख कर उसे जीवित किया। गज का सिर जुड़ने के कारण ही उनका नाम गजानन पड़ा। इस प्रकार माना गया कि हाथी के सिर के साथ भगवान गणेश का दोबारा जन्म हुआ। मान्यताओं के अनुसार यह घटना चतुर्थी के दिन ही हुई थी। इसलिए इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

भगवान शंकर व अन्य देवताओं ने उस गजमुख बालक को अनेक आशीर्वाद दिए। देवताओं ने गणेश, गणपति, विनायक, विघ्नहरता, प्रथम पूज्य आदि कई नामों से उस बालक की स्तुति की।

चंद्रमा के दर्शन करने के दोष का निवारण

इस दिन चन्द्र देव को गणेश जी ने श्राप दिया था। इसलिए जो व्यक्ति इस दिन चंद्र दर्शन करता है वो मिथ्या कलंक का भागी बनता है। अगर भूल से चन्द्र दर्शन हो जाए तो इस दोष के निवारण के लिए नीचे लिखे मन्त्र का 28, 54 या 108 बार जाप करें। श्रीमद्भागवत के दसवें स्कन्द के 57वें अध्याय का पाठ करने से भी चन्द्र दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है।

चन्द्र दर्शन दोष निवारण मन्त्र

सिंहःप्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः।।

चंद्र को देख ही लिया तो इसी कृष्ण-स्यमंतक कथा को पढ़ने या विद्वतजनों से सुनने पर भगवान गणेश क्षमा कर देते हैं। इसके साथ ही कलंक से बचने के लिए दूज का चांद देखना भी जरूरी है।

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गणेश चतुर्थी का महत्‍व

हिन्‍दू धर्म में भगवान गणेश का विशेष स्‍थान है| भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक, मंगलकारी, रक्षाकारक, सिद्धिदायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान प्रदायक माना गया है। Ratanada Ganesh Mandir: Pratham Pujya in Aapno Jodhpur

सभी देवताओं में सबसे पहला स्थान गणेश जी का ही है। कोई भी शुभ काम, पूजा, हवन या मांगलिक कार्य उनकी स्‍तुति के बिना शुरुआत नही होती है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से किसी भी शुभ कार्य में कोई विघ्न, बाधा नहीं आती है। इसलिए हर कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा करने का विधान है।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

धार्मिक मान्यता अनुसार इस त्यौहार को बड़ा पवित्र , शुभ, सिद्धिदायक और महान फल देने वाला बताया गया है। यही वजह है कि भगवान गणेश के जन्‍मदिवस यानी कि गणेश चतुर्थी को देश भर में पूरे विधि-विधान और उत्‍साह के साथ मनाया जाता है। चतुर्थी व्रत से सभी संकट-विघ्न दूर होते हैं। चतुर्थी का माहात्म्य यह है कि इस दिन विधिवत् व्रत करने से श्रीगणेश तत्काल प्रसन्न हो जाते हैं।

गणेश चतुर्थी का सिर्फ धार्मिक और सांस्‍कृतिक महत्‍व ही नहीं है बल्‍कि यह राष्‍ट्रीय एकता का भी प्रतीक है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने तो अपने शासन काल में राष्ट्रीय संस्कृति और एकता को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक रूप से गणेश पूजन शुरू किया था। लोकमान्य तिलक ने 1857 की असफल क्रांति के बाद देश को एक सूत्र में बांधने के मकसद से इस पर्व को सामाजिक और राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाए जाने की परंपरा फिर से शुरू की। गणेश उत्‍सव ने अंग्रेजी शासन की जड़ों को हिलाने का काम बखूबी किया।

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” बोलो गणपति बप्पा मोर्या “

Ganesh Chaturthi 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं|

इस लेख के साथ हम आशा करते हैं कि गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आपको भगवान गणेश जी की असीम कृपा प्रदान हो और गणपति जी के आशीर्वाद से आपका जीवन हमेशा विघ्न-रहित रहे। Connect with us through Facebook for all latest updates of Hindu Tradition, Fasts & Festivals and Culture. Do comment below for any more information or query on Ganesh Chaturthi 2019 and also let us know, how you celebrated.

(इस आलेख में दी गई Ganesh Chaturthi 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं, हिंदू पांचांग और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है।)


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