4th Day of Navratri: माँ कूष्मांडा का पूजन मंत्र, पूजा विधि, भोग व महत्‍व
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4th Day of Navratri: माँ कूष्मांडा का पूजन मंत्र, पूजा विधि, भोग व महत्‍व


The fourth avatar of Goddess Durga is Maa Kushmanda and is worshipped on the 4th tithi of Navratri i.e on October 12, 2018. This Year नवरात्रि के तीसरे दिन नवदुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की उपासना की जा रही है| दरअसल, इस बार पहले दिन मां शैलपुत्री और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की गई और दूसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा हुई| ज्योतिष के जानकारों की मानें तो माँ कूष्मांडा की उपासना से इंसान जीवन के तमाम कष्टों से मुक्त हो सकता है| विशेषकर कुंडली के बुध से जुड़ी परेशानियां मां कूष्मांडा दूर करती हैं|

कुष्मांडा मां, देवी दुर्गा का चौथा स्वरुप हैं. अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ा। संस्कृत भाषा में कुष्मांडा  को कुम्हड़ कहते हैं ज्योतिष विज्ञानं में मां कुष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से है।


She is considered as the creator of this Universe. According to Hindu mythology, Lord Vishnu was only able to create the Universe when Maa Kushmanda smiled like a flower which blossomed with a bud. This stance of Maa Durga is the source of all creation. Ever since she created this universe, she is called Adiswarupa and Adishakti. At the time when there was eternal darkness all around, She created the Universe from nothing.

माँ कूष्मांडा के पास आठ हाथ है, इसीलिए उन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है | इनके हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है, जो अपने भक्तों को अष्टसिद्धि और नवनिद्धि के साथ आशीर्वाद देती हैं। मां के पास इन सभी चीजों के अलावा हाथ में अमृत कलश भी है। माता का वाहन सिंह है और इनके पास एक चमकदार चेहरा और शरीर का रंग सुनहरा है। माता का निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है और इस प्रकार सूर्य लोक को नियंत्रित करती है।

मां कुष्मांडा आध्यात्मिक अभ्यास में अनाहत चक्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। मा कुष्मांडा के दिव्य आशीर्वाद से आपको अपने स्वास्थ्य और धन को बेहतर बनाने में मदद मिलती हैं। वह आपके जीवन से सभी बाधाओं और परेशानियों को हटा देती है और आपको जीवन में सभी प्रकार के दुखों से छुटकारा पाने में सक्षम बनाती है। मां अंधेरे में प्रकाश लाती है और आपके जीवन में सद्भाव स्थापित करती है।

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माँ कूष्मांडा की पूजा विधि

सुबह स्‍नान कर पूजा स्‍थान पर बैठें| माँ कूष्मांडा की पूजा करते समय हरे कपड़े पहने, पूजन के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ और कुम्हड़ा अर्पित करें, इसके बाद उनके मुख्य मंत्र ‘ॐ कुष्मांडा देव्यै नमः‘ का 108 बार जाप करें. पूजा मे उपयोग करने के लिए सबसे शुभ फूल लाल रंग के फूल हैं।

हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम करें, इसके पश्‍चात कूष्मांडा मंत्र का जाप करें | ध्‍यान रहे कि मां की पूजा अकेले ना करें | मां की पूजा के बाद भगवान शंकर की पूजा करना ना भूलें| इसके बाद भगवान विष्‍णु और मां लक्ष्‍मी की एक साथ पूजा करें| मां कुष्‍मांडा को मालपुए का भोग लगाएं| मां को भोग लगाने के बाद प्रसाद किसी ब्राहृमण को दान कर दें | इससे बुद्ध‍ि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है.

देवी कूष्मांडा का विशेष भोग

मां को मालपुए का भोग लगाएं, इसके बाद प्रसाद को किसी ब्राह्मण को दान कर दें और खुद भी खाएं। इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाएगी.

माँ कूष्मांडा की पूजा का महत्व?

माँ कूष्मांडा वह है जो सूर्य देवता को दिशा और ऊर्जा देती है। वह कुंडली में सूर्य की प्रतिकूल स्थिति द्वारा बनाई गई सभी परेशानियों को हटा देती है। इसके अलावा, मनुष्य सभी बीमारियों से राहत प्राप्त करता है और समाज में प्रसिद्धि और स्थिति प्राप्त करता है।

देवी कुष्मांडा व उनकी आठ भुजाएं हमें कर्मयोगी जीवन अपनाकर तेज अर्जित करने की प्रेरणा देती हैं, उनकी मधुर मुस्कान हमारी जीवनी शक्ति का संवर्धन करते हुए हमें हंसते हुए कठिन से कठिन मार्ग पर चलकर सफलता पाने को प्रेरित करती है।

मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। मां कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं।

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माँ कूष्मांडा का पूजन मंत्र

आज के दिन यदि आप मां कूष्मांडा की उपासना करने जा रहे हैं तो सबसे पहले मां का ध्यान मंत्र पढ़कर उनका आहवान करें।

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

Mantras of Maa Kushmanda

‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडायै नम:’ ||

स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता।

करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।।

“Om Devi Kushmandayayi Namah”

 

Prarthna of Maa Kushmanda

Surasampurna Kalasham Rudhiraplutameva Cha

Dadhana Hastapadmabhyam Kushmanda Shubhadastu Me

Stuti of Maa Kushmanda

Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Kushmanda Rupena Samsthita |

Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah ||

Dhyana of Maa Kushmanda

 वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

Vande Vanchhita Kamarthe Chandrardhakrita shekharam |

Simharudha Ashtabhuja Kushmanda Yashasvinim ||

Bhaswara Bhanu Nibham Anahata Sthitam Chaturtha Durga Trinetram |

Kamandalu, Chapa, Bana, Padma, Sudhakalasha, Chakra, Gada, Japawatidharam ||

Patambara Paridhanam Kamaniyam Mriduhasya Nanalankara Bhushitam |

Manjira, Hara, Keyura, Kinkini, Ratnakundala, Manditam||

Praphulla Vadanamcharu Chibukam Kanta Kapolam Tugam Kucham|

Komalangi Smeramukhi Shrikanti Nimnabhi Nitambanim||

Stotra of Maa Kushmanda

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥

 Durgatinashini Tvamhi Daridradi Vinashanim |

Jayamda Dhanada Kushmande Pranamamyaham ||

Jagatamata Jagatakatri Jagadadhara Rupanim |

Charachareshwari Kushmande Pranamamyaham ||

Trailokyasundari Tvamhi Duhkha Shoka Nivarinim |

Paramanandamayi, Kushmande Pranamamyaham ||

माँ कूष्मांडा की जय हो..!!

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