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Kanya Puja 2020: जानिए अष्टमी और नवमी की सही तिथि, कन्या पूजन मुहूर्त, विधि, पूजा का महत्व, नियम और मंत्र

Kanya Puja 2020: भक्‍त मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने के लिए इन नवरात्रि के नौ दिनों में पूजा पाठ और व्रत रखते हैं। नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। कुछ लोग अष्टमी को तो कुछ लोग नवमी को अपनी परंपराओं के अनुसार कन्या पूजन करते हैं। माता के भक्त नौ कन्याओं को नौ देवियों का रूप मानकर पूजा करते है। कन्‍या पूजन को कंजक पूजन (Kanjak Pujan) भी कहते है। मान्यता है कि इससे देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं।

बहुत से लोग 9 दिन तो कुछ प्रथम और अष्टमी का व्रत रखते हैं। जो लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत नहीं रख पाते हैं वे भी अष्‍टमी का व्रत रखते हैं। पूरी नवरात्रि में व्रत रखने वाले लोग नवमी तिथि को नवरात्रि का आखिरी व्रत करते हैं। 17 अक्टूबर से हुए शुरू नवरात्रि (Navratri) के आखिरी दो दिनों में यानी अष्टमी व नवमी के दिन कन्या पूजन (Kanya Pujan) की परपंरा है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के 9 स्वरूपों की पूजा होती है और कन्या पूजन में इन्ही नौ रूपों की पूजा होती है।


कन्या पूजन को शुभ मुहूर्त में सही विधि विधान से किया जाना चाहिए। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर उलझन हैं। जानिए इस साल शारदीय नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी सही तिथि, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त विधि, पूजा का महत्व, नियम और मंत्र।

कब है अष्टमी और नवमी तिथि

ज्योतिष में उदया तिथि का महत्व ज़्यादा है अर्थात जैसे कोई भी पर्व किसी भी तिथि को रात्रि में लगा और अगले दिन तक रहा तो अगली तिथि के पर्व में सूर्योदय आया इसीलिए उस तिथि को ही उस पर्व का महत्व है।

इस बार किसी भी नवरात्रि व्रत का क्षय नहीं हुआ है। इस साल दशहरा और नवमी एक ही दिन हैं। अष्टमी 24 अक्टूबर (शनिवार) और नवमी 25 अक्टूबर (रविवार) को पड़ रही है। हालांकि मुहूर्त के हिसाब से कई लोग अष्टमी और नवमी एक साथ भी मना रहे हैं।

इसके साथ ही 25 अक्टूबर की सुबह की सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर नवमी तिथि समाप्त होने के कारण शाम को दशहरा (विजयादशमी) मनाया जाएगा।

Kanya Puja 2020 Shubh Muhurat

नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत हैं। शुक्रवार को सप्तमी का व्रत है, जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे लोग सप्तमी शुक्रवार को व्रत रखेंगे और शनिवार को अष्टमी का कन्या पूजन करेंगे। इसके अलावा जो लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं, वे लोग शनिवार को अष्टमी का व्रत रखेंगे और रविवार को कन्या पूजन करेंगे।

अष्टमी तिथि प्रारंभ– 23 अक्टूबर की सुबह 06 बजकर 57 मिनट से।

अष्टमी तिथि समाप्त– 24 अक्टूबर की सुबह 06 बजकर 58 मिनट तक।

नवमी तिथि आरंभ– 24 अक्टूबर की सुबह 06 बजकर 58 मिनट से।

नवमी तिथि समाप्त– 25 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक।

जब अष्टमी व नवमी एक तारीख पर मिल रही होती हैं तो नवमी तिथि पर ही अष्टमी का कन्या पूजन श्रेष्ठ बताया गया है। उदया तिथि और नवमी तिथि लग जाने के कारण अष्टमी व नवमी को कन्या पूजन 24 अक्टूबर को दोपहर तक करवा सकते हैं। कन्या पूजन (Kanya Puja 2020) के लिए यह समय सबसे उत्तम है।

कन्या पूजन विधि Kanya Puja Vidhi

नवरात्रि में नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरुपों का प्रतीक माना जाता है। कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन करवाना आवश्यक होता है क्योंकि उन्हें बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है। क्योंकि मां के साथ भैरव की पूजा आवश्यक मानी गई है। कन्या पूजन के लिए हलवा, पूड़ी और चने प्रसाद के रूप में बनाए jata हैं।

अगर आप अष्टमी के दिन कन्या पूजन कर रहे हैं तो सुबह के समय स्‍नानादि से निवृत्त होकर भगवान गणेश और महागौरी की पूजा करें। वहीं, अगर आप नवमी पर कन्या पूजन कर रहे हैं तो गणेश की पूजा करने के बाद मां सिद्धिदात्री की पूजा करें।

  • कन्या पूजन के लिए एक दिन पहले दो से दस साल की नौ कन्याओं को आदर के साथ आमंत्रित करें।
  • गृह प्रवेश पर कन्याओं पर पुष्प वर्षा कर स्वागत करना चाहिए। इसके साथ ही मां दुर्गा के नौ नामों का जयकारा लगाना चाहिए।
  • कन्याओं के साथ एक बालक को स्वच्छ आसन में बैठाकर साफ पानी या दूध से भरे थाल में पैर रखवाकर पैरों को धोना चाहिए। पैर छूकर आशीष लेना चाहिए।
  • कन्याओं को माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम का तिलक लगाना चाहिए।
  • फिर कन्या के हाथ में मौली (कलावा) बांधें।
  • इसके बाद घी का दीपक जलाएं और कन्या की आरती उतारें।
  • मां दुर्गा का ध्यान लगाने के बाद देवी स्वरूप कन्याओं को पूड़ी, चना और हलवा का भोजन कराएं।
  • इसके साथ ही कन्याओं को नारियल, फल और दक्षिणा और कहीं, कहीं चूड़िया और बिंदी भी दी जाती है।
  • भोजन के बाद सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को भेंट स्वरूप धन और उपहार देकर दोबारा पांव छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें विदा करें।

कन्या पूजन मंत्र Kanya Puja Mantra

‘या देवी सर्वभूतेषु शांति रूपेण संस्थिता।

नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम:।’

कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि पर कन्या पूजन करने से मां प्रसन्न होती हैं। और अपने भक्तों की हर इच्छा को पूर्ण करती हैं। शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन करने से सुख-शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कन्या पूजन से पहले हवन करवाने का प्रावधान होता है। हवन कराने से घर में व्याप्त सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं।

साथ ही याद रखें कि कन्याओं को सिर्फ अष्टमी या नवमीं वाले दिन ही नहीं बल्कि साल के हरेक दिन उनका सम्मान करें

Here’s wishing you all a Happy Navratri !

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(इस आलेख में दी गई Kanya Puja 2020 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं, हिंदू पांचांग और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है।)


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