Shattila Ekadashi 2019: षटतिला एकादशी व्रत कथा, पूजा-विधि और महत्व: माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं, इस दिन काले तिलों के दान का विशेष महत्व होता है। षटतिला एकादशी हिंदू धर्म में बेहद ही खास मानी जाती है। इस बार Shattila Ekadashi 2019, 31 जनवरी, गुरुवार को है।
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Shattila Ekadashi 2019: षटतिला एकादशी व्रत कथा, पूजा-विधि और महत्व


Shattila Ekadashi 2019माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं, इस दिन काले तिलों के दान का विशेष महत्व होता है। षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) हिंदू धर्म में बेहद ही खास मानी जाती है। इस बार Shattila Ekadashi 2019, 31 जनवरी, गुरुवार को है और 1 फरवरी को दान-दक्षिणा के बाद व्रत खोला जाएगा। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत और दान करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती हैं। षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु की खास पूजा-अर्चना की जाती है।

हर महीने में 2 बार एकादशी आती है। लेकिन इनमें से कुछ एकादशी का खास महत्व होता है। उन्ही खास एकादशी में से एक है षटतिला एकादशी भी जो माघ महीने में आती है। इस एकादशी में तिल का भी बेहद खास महत्व है। पूजा से लेकर दान करने और हवन करने तक, हर चीज़ में तिल का इस्तेमाल किया जाता है। यहां जानिए षटतिला एकादशी व्रत का महत्व, पूजा विधि, व्रत कथा, पारण का समय और शुभ मुहूर्त के बारे में।


Shattila Ekadashi 2019 Date | Shubh Muhurat

षटतिला एकादशी का व्रत माघ महीने की कुष्ण पक्ष की एकादशी को होता है, इस बार ये व्रत 31 जनवरी, 2019 यानि गुरूवार को है।

एकादशी तिथि प्रारम्भ: 30 जनवरी 2019 को दोपहर 03 बजकर 33 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 31 जनवरी 2019 को शाम 05 बजकर 02 मिनट तक

पारण (व्रत तोड़ने का) की तिथि: 01 फरवरी 2019 को सुबह 07 बजकर 11 मिनट से सुबह 09 बजकर 23 मिनट तक
पारण तिथि समाप्‍त: 01 फरवरी 2019 को शाम 06 बजकर 59 मिनट.

षटतिला एकादशी का व्रत 1 फरवरी को तय मुहूर्त में सुबह उठकर स्नान के बाद भोजन बनाएं, भगवान विष्णु को भोग लगाए, ब्राह्मणों को दान दें और उसके बाद अपना व्रत खोलें।

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षटतिला एकादशी व्रत की पूजन विधि

  • षटतिला एकादशी पर सबसे पहले सुबह नहा-धोकर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें।
  • अपनी सभी इंद्रियों को वश में कर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्‍या और द्वेष का त्‍याग कर श्री हरि विष्‍णु का स्‍मरण करें।
  • अब घर के मंदिर में श्री हरि विष्‍णु की मूर्ति या फोटो के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्‍प लें।
  • भगवान विष्‍णु की प्रतिमा को स्‍नान कराएं और वस्‍त्र पहनाएं।
  • अब भगवान विष्‍णु को नैवेद्य और फलों का भोग लगाएं।
  • इसके बाद विष्‍णु को धूप-दीप दिखाकर विधिवत् पूजा-अर्चना करें और आरती उतारें।
  • श्रीविष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करने सुख तथा संपदा में वृद्धि होगी। श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।
  • पूरे दिन निराहार रहें, शाम के समय कथा सुनने के बाद फलाहार करें और रात में जागरण करें।
  • षटतिला एकादशी के दिन पुष्य नक्षत्र में गोबर, कपास, तिल मिलाकर उनके कंडे या पिंड‍िका बनानी चाहिए। उन कंडों से 108 बार हवन करें।
  • दूसरे दिन द्वादशी पर सुबह सवेरे नहा धोकर भगवान विष्‍णु का पूजन करने के बाद उन्‍हें खिचड़ी का भोग लगाए और फिर पेठा, नारियल या सुपारी का अर्घ्‍य दे।
  • इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और उसके बाद ही खुद भोजन ग्रहण करें। भोजन में तिल से बने खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें। उसे जल से भरा घड़ा दान में दें। ब्राह्मण को श्यामा गौ और तिल पात्र देना भी अच्‍छा माना जाता है।
  • मान्‍यता है कि जो जितने तिलों का दान करता है, उतने ही हजार वर्ष स्वर्ग में वास करता है।

षटतिला एकादशी पर तिल का महत्व

षटतिला एकादशी के नाम से ही जानकारी मिलती है कि इस एकादशी पर तिलों का खास महत्व है। षटतिला एकादशी के दिन दान पुण्य करने का खास महत्व है। इस दिन तिलों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। इस दिन छह तरीकों से तिल का इस्‍तेमाल करना चाहिए-

1. तिल स्नान – स्‍नान के पानी में तिल का प्रयोग करें और पीले कपड़े पहनें।
2. तिल का उबटन – तिल का उबटन लगाएं।
3. तिल का हवन  – पूर्व दिशा की ओर बैठ जाएं, फिर पांच मुट्ठी तिल लेकर 108 बार “ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र” का जाप करें।
4. तिल का तर्पण – दक्षिण दिशा की ओर खड़े होकर पितरों को तिल का तर्पण दें।
5. तिल का भोजन  – एकादशी के दूसरे दिन यानी कि द्वादश को ब्राह्मणों को तिल युक्‍त फलाहारी भोजन कराना चाहिए।
6.  तिल का दान – दूसरे दिन ब्राह्मणों को तिल का दान दें। मान्‍यता है कि इस दिन जो जितना अधिक तिल का दान करेगा उसे स्‍वर्ग में रहने का उतना ही अवसर मिलेगा।

छह तरीकों से तिल के प्रयोग के कारण ही इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है। इस व्रत रखने वालों के अलावा सभी को लोगों कुछ इस तरह छह तरीकों से तिल का इस्‍तेमाल करना चाहिए।

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षटतिला एकादशी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार नारदजी ने भगवान श्रीविष्णु से षटतिला एकादशी कथा के बारे में पूछा।  भगवान ने नारदजी से कहा, “हे नारद! मैं तुमसे सत्य घटना कहता हूं, ध्यानपूर्वक सुनो। प्राचीन काल में मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहती थी, जो मेरी बड़ी भक्त थी और पूरी श्रद्धा से मेरी पूजा करती थी। वह सदैव व्रत किया करती थी। एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही और मेरी उपासना की। व्रत के प्रभाव से उसका शरीर तो शुद्ध हो गया लेकिन अत्यंत दुर्बल हो गया। वो ब्राह्मणी कभी अन्न दान नहीं करती थी एक दिन भगवान विष्णु खुद उस ब्राह्मणी के पास भिक्षा मांगने पहुंचे।

वह ब्राह्मणी बोली, “महाराज किसलिए आए हो?” मैंने कहा- “मुझे भिक्षा चाहिए।” इस पर उसने एक मिट्टी का ढेला (पिण्ड) मेरे भिक्षापात्र में डाल दिया। मैं उसे लेकर अपने लोक में लौट आया।

कुछ समय बाद ब्राह्मणी भी शरीर त्याग कर विष्णु लोक में आ गई। मिट्टी का दान करने से उस ब्राह्मणी को सुंदर महल मिला, परंतु उसने अपने घर को अन्नादि सब सामग्रियों से शून्य पाया। घबरा कर वह मेरे पास आई और कहने लगी, “भगवन् मैं तो धर्मपरायण हूं, मैंने अनेक व्रत आदि से आपकी पूजा की, परंतु फिर भी मेरा घर अन्नादि सब वस्तुओं से शून्य है। इसका क्या कारण है?” तब मैंने बताया कि यह अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड देने के कारण हआ है।

इस पर भगवान विष्णु कहा, “पहले तुम अपने घर जाओ। देवस्त्रियां आएंगी तुम्हें देखने के लिए। उनसे पहले षटतिला एकादशी व्रत का पुण्य और विधि सुन लो, तब द्वार खोलना।” मेरे ऐसे वचन सुनकर वह अपने घर गई। जब देवस्त्रियां आईं और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली- “आप मुझे देखने आई हैं तो पहले षटतिला एकादशी का माहात्म्य मुझसे कहो।”

उनमें से एक देवस्त्री कहने लगी कि मैं कहती हूं। जब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का माहात्म्य सुना तब द्वार खोल दिया। देवांगनाओं ने उसको देखा कि न तो वह गांधर्वी है और न आसुरी है वरन पहले जैसी मानुषी है। उस ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और रूपवती हो गई तथा उसका घर धन धान्य समस्त सामग्रियों से युक्त हो गया।

षटतिला एकादशी व्रत महत्व

षटतिला एकादशी व्रत से दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।  इस दिन जो लोग पूरे विधि विधान से व्रत रखते हैं उन्‍हें भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही आरोग्यता तथा सम्पन्नता आती है। षटतिला एकादशी के दिन दान का बहुत महत्व है। इस दिन तिल का दान करने और श्रद्धा पूर्वक व्रत रखने से कई जन्मों का पाप कटता है।

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Shattila Ekadashi 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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(इस आलेख में दी गई Shattila Ekadashi 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

(Image Credit: Hari Bhoomi)

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