Radha Ashtami 2019: राधा रानी जन्म कथा, राधाष्टमी पूजन व उद्यापन विधि और महत्व। Radha Jayanti is celebrated to observe the birth anniversary of Goddess Radha. राधाष्टमी का पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल, राधा अष्टमी का पर्व, 6 सितंबर 2019 शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।
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Ub Chhath 2019: ऊब छठ व्रत कथा, नियम, पूजा और उद्यापन विधि


ऊब छठ का व्रत विवाहित स्त्रियां अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए तथा कुंआरी लड़कियां अच्छे पति की कामना से करती है। भाद्र पद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ (षष्टी तिथि) को ऊब छठ का पर्व मनाया जाता है। ऊब छठ को चन्दन षष्टीचन्ना छठ और चाँद छठ के नाम से भी जाना जाता है। Ub Chhath 2019 will be celebrated with full tradition and customs on Wednesday, August 21, 2019. Usually, Ub Chath comes on sixth day of Raksha Bandhan and two days before Krishna Janmashtami.

भगवान कृष्ण के भ्राता बलराम का जन्म दिन बुधवार, Bhadrapad Krishna paksh 6, को ऊब छठ, ‘चंदन षष्ठी’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाएगा। शाम ढलने के बाद व्रत रखने वाली महिलाए और कुंआरी लड़कियां मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन के साथ, परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।


ऊब छठ का व्रत रखने वाली महिलाए और कन्याए सूर्यास्त से चंद्रोदय तक खड़े रहकर मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा अर्चना करती हैं और साथ मे पौराणिक धार्मिक कथाओं का श्रवण करती हैं। महिलाए रात्रि में चंद्रमा निकलने पर चंद्रमा जी को अर्ध्य देने के बाद व्रत का पालना करती हैं। सूर्यास्त से लेकर चंद्रोदय तक व्रती खड़े रहते है, इसीलिए इसको ऊब छठ कहते है।

ऊब छठ की पूजन सामग्री – Ub Chhath Poojan Samagri

कुमकुम, चावल, चन्दन, सुपारी, पान, कपूर, फल, सिक्का, सफ़ेद फूल, अगरबत्ती, दीपक।

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ऊब छठ की पूजा विधि / Ub Chhath Pooja Vidhi

  • स्त्रियां इस दिन पूरे दिन का उपवास रखती है।
  • शाम को दुबारा स्नान कर स्वच्छ और नए कपड़े पहनती है।
  • कुछ लोग लक्ष्मी जी और और गणेश जी की पूजा करते है और कुछ अपने इष्ट की।
  • चन्दन घिसकर भगवान को चन्दन से तिलक करके अक्षत अर्पित करते है। सिक्का, फूल, फल, सुपारी चढ़ाते है। दीपक, अगरबत्ती जलाते है।
  • फिर हाथ में चन्दन लेते है। कुछ लोग चन्दन मुँह में भी रखते है। इसके बाद ऊब छट व्रत और गणेशजी की कहानी सुनते है।
  • मंदिर जाकर भजन करती है।
  • इसके बाद व्रती जब तक चंद्रमा जी न दिख जाये, जल भी ग्रहण नही करती और ना ही नीचे बैठती है। ऊब छठ के व्रत का नियम है कि जब तक चांद नहीं दिखेगा तब तक महिलाओं को खड़े रहना पड़ता है।
  • व्रती मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा अर्चना करके परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और खड़े रहकर पौराणिक कथाओं का श्रवण करती हैं।
  • चंद्रोदय पर चाँद को अर्ध्य देकर पूजा-अर्चना की जाती है। चाँद को जल के छींटे देकर कुमकुम, चन्दन, मोली, अक्षत और भोग अर्पित करते हैं।
  • कलश से जल चढ़ायें। एक ही जगह खड़े होकर परिक्रमा करें। अर्ध्य देने के बाद व्रत का पालना करती है। लोग व्रत खोलते समय अपने मान्यता के अनुसार नमक वाला या बिना नमक का खाना खाते है।

ऊब छठ के व्रत की उद्यापन विधि/Ub Chhath 2019 Ka Udyapan

इस व्रत के उद्यापन के लिए पाव वजन के आठ लडडू बनाये जाते है। ये लडडू एक प्लेट में रखकर व्रत करने वाली आठ स्त्रियों को दिए जाते है। साथ में एक नारियल भी दिया जाता है। नारियल पर कुमकुम के छींटे दिए जाते है। एक प्लेट में लडडू और नारियल विनायक भी को दिया जाता है।

ये प्लेट घर पर जाकर दे सकते है या उनको भोजन के लिए निमंत्रण देकर भोजन कराके भी दे सकते है। प्लेट देते समय पहले महिला को तिलक करें। फिर प्लेट में लडडू और नारियल दें।

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ऊब छठ व्रत कथा/Ub Chhath Vrat Katha

ऊब छठ का व्रत और पूजा करते समय ऊब छठ व्रत कथा सुनते है, जिससे व्रत का पूरा फल प्राप्त हो सके।

किसी गांव में एक साहूकार और इसकी पत्नी रहते थे। साहूकार की पत्नी रजस्वला होने पर भी सभी प्रकार के काम कर लेती थी। रसोई में जाना, पानी भरना, खाना बनाना, सब जगह हाथ लगा देती थी। उनके एक पुत्र था। पुत्र की शादी के बाद साहूकार और उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई।

अगले जन्म में साहूकार एक बैल के रूप में और उसकी पत्नी कुतिया बनी। ये दोनों अपने पुत्र के यहाँ ही थे। बैल से खेतों में हल जुताया जाता था और कुतिया घर की रखवाली करती थी।

श्राद्ध के दिन पुत्र ने बहुत से पकवान बनवाये। खीर भी बन रही थी। अचानक कही से एक चील जिसके मुँह में एक मरा हुआ साँप था, उड़ती हुई वहाँ आई। वो सांप चील के मुँह से छूटकर खीर में गिर गया। कुतिया ने यह देख लिया। उसने सोचा इस खीर को खाने से कई लोग मर सकते है। उसने खीर में मुँह अड़ा दिया ताकि उस खीर को लोग ना खाये।

पुत्र की पत्नी ने कुतिया को खीर में मुँह अड़ाते हुए देखा तो गुस्से में एक मोटे डंडे से उसकी पीठ पर मारा। तेज चोट की वजह से कुतिया की पीठ की हड्डी टूट गई। उसे बहुत दर्द हो रहा था। रात को वह बैल से बात कर रही थी।

उसने कहा तुम्हारे लिए श्राद्ध हुआ तुमने पेट भर भोजन किया होगा। मुझे तो खाना भी नहीं मिला, मार पड़ी सो अलग। बैल ने कहा – मुझे भी भोजन नहीं मिला, दिन भर खेत पर ही काम करता रहा। ऊब छठ के व्रत की कहानी ये सब बातें बहु ने सुन ली और उसने अपने पति को बताया। उसने एक पंडित को बुलाकर इस घटना का जिक्र किया।

पंडित में अपनी ज्योतिष विद्या से पता करके बताया की कुतिया उसकी माँ और बैल उसके पिता है। उनको ऐसी योनि मिलने का कारण माँ द्वारा रजस्वला होने पर भी सब जगह हाथ लगाना, खाना बनाना, पानी भरना था।

उसे बड़ा दुःख हुआ और माता पिता के उद्धार का उपाय पूछा। पंडित ने बताया यदि उसकी कुँवारी कन्या भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्टी यानि ऊब छठ का व्रत करे। शाम को नहा कर पूजा करे उसके बाद बैठे नहीं। चाँद निकलने पर अर्ध्य दे। अर्ध्य देने पर जो पानी गिरे वह बैल और कुतिया को छूए तो उनका मोक्ष हो जायेगा।

जैसा पंडित ने बताया था कन्या ने ऊब छठ का व्रत किया, पूजा की। चाँद निकलने पर चाँद को अर्ध्य दिया। अर्ध्य का पानी जमीन पर गिरकर बहते हुए बैल और कुतिया पर गिरे ऐसी व्यवस्था की। पानी उन पर गिरने से दोनों को मोक्ष प्राप्त हुआ और उन्हें इस योनि से छुटकारा मिल गया।

हे! ऊब छठ माता, जैसे इनका किया वैसे सभी का उद्धार करना। कहानी लिखने वाले और पढ़ने वाले का भला करना।

बोलो छठ माता की…. जय !!!

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Ub Chhath 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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(इस आलेख में दी गई Ub Chhath 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है।)

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