आश्विन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। Sharad Purnima 2018, 24 अक्टूबर बुधवार को है और यह 23 अक्टूबर रात से ही शुरू हो जाएगी। शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का हिंदू धर्म में खासा महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस रात को चांद से अमृत बरसता है। इसे कोजागर पूर्णिमा, रास पूर्णिमा, कौमुदी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उजले चावल की खीर बनाकर आसमान के नीचे रखने और बाद मे खाने की परंपरा है।
हेमंत ऋतु आज से ही शुरू होती है। कहते हैं इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत भर जाता है और ये किरणें हमारे लिए बहुत लाभदायक होती हैं। दरअसल पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक मां लक्ष्मी का जन्म इसी दिन हुआ था। साथ ही भगवान कृष्ण ने गोपियों संग वृंदावन के निधिवन में इसी दिन रास रचाया था।
Sharad Purnima 2018 Date and Time
इस बार शरद पूर्णिमा 24 अक्टूबर को है और यह 23 अक्टूबर रात से ही शुरू हो जाएगी। शरद पूर्णिमा के लिए पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 23 अक्टूबर को रात 10:38 पर होगी। दूसरी तरफ पूर्णिमा तिथि 24 अक्टूबर रात 10:14 बजे समाप्त हो रही है।
Sharad Purnima 2018 पूजन शुभ मुहूर्त
24 तारीख की शाम में 5 बजकर 40 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक का समय बहुत ही शुभ रहेगा। पांच मिनट के इस समय में आप जो भी शुभ कार्य करेंगे, उसे पूर्णता तक पहुंचाने के लिए मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसके बाद रात में 9 बजकर 24 मिनट से रात 11 बजकर 37 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान आप ध्यान, मन और विधि-विधान के साथ मां लक्ष्मी और श्रीहरि की पूजा करें।
मन के स्वामी चंद्र देव हैं। इसलिए शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करने का विधान भी है, जिसमें उन्हें पूजा के अंत में अर्घ्य भी दिया जाता है।
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शरद पूर्णिमा महत्व | Importance of Sharad Purnima
शरद पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व माना गया है, इसी तिथि से शरद ऋतु का आरम्भ होता है। इस दिन चन्द्रमा संपूर्ण और सोलह कलाओं से युक्त होता है। कहते हैं कि इस दिन व्रत रखने से सभी मनोरथ पूर्ण होते है और व्यक्ति के सभी दुख दूर होते हैं। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास होता है, लिहाजा उसकी किरणें बेहद प्रखर और चमकीली होती हैं। इनको धरती के लोगों के लिए कई मायनों में प्रभावकारी और लाभदायक माना गया है।
शरद पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण तिथि है, इसे कौमुदी व्रत भी कहा जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो विवाहित स्त्रियां व्रत रखती है उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। जो माताएं अपने बच्चों के लिए व्रत रखती है तो उनके संतान की आयु लंबी होती है। अगर कुंवारी कन्याएं ये व्रत रखती हैं तो उन्हें सुयोग्य और उत्तम वर की प्राप्ति होती है।
शरद पूर्णिमा के दिन चांद किसी भी दिन के मुकाबले सबसे चमकीला होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आसमान मे चन्द्रमा से अमृत बरसता है। चंद्रमा की किरणों में इस दिन तेज बहुत होता है जिससे आपकी आध्यात्मिक, शारीरिक शक्तियों का विकास होता है साथ ही इन किरणों में इस दिन असाध्य रोगों को दूर करने की क्षमता होती है।
इस दिन चन्द्रमा से अमृत की वर्षा होती है जो धन, प्रेम और सेहत तीनों देती है। प्रेम और कलाओं से परिपूर्ण होने के कारण कृष्ण ने इसी दिन महारास रचाया था। इस दिन विशेष प्रयोग करके बेहतरीन सेहत, अपार प्रेम और खूब सारा धन पाया जा सकता है
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क्यों बनाते हैं दूध और चावल की खीर?
धार्मिक आस्था है कि शरद पूर्णिमा की रात में आसमान से अमृत की वर्षा होती है। चांदनी के साथ झरते हुए हुए इस अमृत रस को समेटने के लिए ही आज की रात खीर बनाकर चंद्रमा की चांदनी में रखा जाता है।
यह मान्यता युगों से एक परंपरा के रूप में चली आ रही है। शरद पूर्णिमा की रात दूध और चावल से बनी खीर को छन्नी से ढककर खुले आसमान के नीचे रखना चाहिए। दूध, चावल, चीनी इनका संबंध चांद और देवी लक्ष्मी से है।
इस खीर को अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए। पौराणिक मान्यता है कि इस खीर में अमृत का अंश होता है, जो आरोग्य सुख प्रदान करता है। इसलिए स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए शरद पूर्णिमा के दिन खीर जरूर बनानी चाहिए और रात में इस खीर को खुले आसमान के नीचे जरूर रखना चाहिए। इसी के साथ आर्थिक संपदा के लिए शरद पूर्णिमा को रात्रि जागरण का विधान शास्त्रों में बताया गया है।
शरद पूर्णिमा व्रत विधि
- पूर्णिमा के दिन सुबह इष्ट देव का पूजन करना चाहिए।
- इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए।
- ब्राह्मणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है। इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
- रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए।
- मंदिर में खीर आदि दान करने का विधि-विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है।
Laxmi Puja on Sharad Purnima 2018
शरद पूर्णिमा के दिन व्रत रखने के साथ मां लक्षमी की पूजा करते हैं। मां लक्ष्मी को लाल रंग के कपड़े पर आसन देना चाहिए। फिर धूम-बत्ती और कपूर से उनकी पूजा करनी चाहिए। साथ ही उसके बाद आप संकल्प लें। फिर लक्ष्मी चालीसा और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। फिर मां लक्ष्मी की आरती करें।
मान्यताओं के मुताबिक इस दिन ब्राह्माणों को खीर का भोजन करवाना चाहिए जो बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही ब्राह्मणों को अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा भी देनी चाहिए। शरद पूर्णिमा पर जागरण करना आपके जीवन के लिए अत्यंत शुभ होता है।
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