Shraddh Paksh: जानें श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन क्यों हैं आवश्यक और क्या हैं नियम? Why brahmin bhoj is necessary during Shraddh (pitru) paksh, Important rules what and how to prepare brahman bhoj during Shraddh, श्राद्ध के भोजन में रखें क्या सावधानियां, श्राद्ध पर भोजन करने आए ब्राह्मण के लिए नियम
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जानें श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन क्यों हैं आवश्यक और क्या हैं नियम

श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन: हिन्दू धर्म में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए लोग पितृ पक्ष में श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध में तर्पण, पिंड दान और ब्राह्मण भोजन का विशेष महत्व बताया जाता है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इन दिनों में पितर धरती पर आते हैं। ऐसे में उनके नाम से दान आदि करना चाहिए और ब्राह्मण, घर की स्वासिनी (बहन बेटी) और गरीबों को भोजन कराया जाना चाहिए।

This year Shraddh Paksh 2019 will be from September 13 (भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि) till September 28, 2019 (आश्विन की अमावस्या तिथि).  मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पर ब्राह्मणों को भोज कराना अनिवार्य है। बिना ब्राह्मण भोज के पितर भी भोजन नहीं लेते और वो भूखे-प्यासे ही नाराज होकर धरती से लौट जाते हैं। और उनके परिवार को पितृदोष लगता है। श्राद्ध कर्म करने वाले संबंधित व्यक्ति को ब्राह्मण भोज के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे पितरों का आशीर्वाद और कृपा मिल सके।


श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण को भोजन करवाने के भी कई विशेष नियम होते हैं। श्राद्ध का भोजन बनाने से लेकर ग्रहण करने तक, कुछ विशेष नियम हैं, जिसका पालन जरूर करना चाहिए। आइए, इस आलेख मे जाने की कैसे हम ब्राह्मण भोज से अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

श्राद्ध पक्ष में क्यों आवश्यक हैं ब्राह्मण भोजन?

श्राद्ध में ब्राह्मणों, ज़रूरतमन्दो, सवासिनियो को भोजन करवाना एक जरूरी परंपरा है। पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के बाद ब्राह्मण भोज कराने का विधान बताया गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, श्राद्ध वाले दिन ब्राह्मणों के साथ वायु रूप में पितृ भी भोजन ग्रहण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ब्राह्मणों द्वारा किया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है।

पितृ अपने प्रियजनों के द्वारा किया गया तर्पण-श्राद्धादिब्राह्मण भोज से तृप्त होते हैं और अपने लोक को वापिस लौटते हुए ढेर सारे आशीर्वाद देकर जाते हैं, इससे तन, मन और घर में शांति आती है, रोग और शोक से भी मुक्ति मिलती है। इसलिए श्राद्धकर्म कराने वाले हर व्यक्ति को ब्राह्मण भोज अवश्य कराना चाहिए।

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श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन में क्या बनाना चाहिए और क्या हैं निषेध?

आपको इन सब बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

श्राद्ध के निमित्त भोजन में रखें इन सावधानियां को

  • श्राद्ध में चावल की खीर, पूरी का विशेष महत्‍व है, लेकिन कोशिश करें कि खीर गाय के दूध से बनी हो। श्राद्ध में गाय का दूध, दही, घी का इस्तेमाल किया जाता है।
  • जौ, मटर और सरसों का उपयोग श्रेष्ठ है।
  • ज़्य़ादा पकवान पितरों की पसंद के होने चाहिए।
  • गंगाजल, दूध, शहद, कुश और तिल सबसे ज्यादा ज़रूरी है।
  • तिल ज़्यादा होने से उसका फल अक्षय होता है। तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं।
  • इस दिन उड़द की दाल के बड़े, बेल पर लगने वाले मौसमी सब्जियां जैसी लौकी, तोरी, भिंडीकच्चे केले की सब्जी आदि बनानी चाहिए।
  • श्राद्ध के निमित्त सात्विक भोजन घर में ही बनाना चाहिए।

श्राद्ध के भोजन में क्या न बनाएं या परोसें ?

  • श्राद्ध के दिन लहसुन, प्याज, बैंगन का परहेज किया जाना चाहिए।
  • मूली, आलू, अरबी आदि जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां पितरों के श्राद्ध के दिन नहीं बनाई जाती है।
  • बड़ी सरसों, काले सरसों की पत्ती और बासी, खराब अन्न का उपयोग नही किया जाता।
  • श्राद्ध के दौरान चना, मसूर, काली उड़द, कुलथी, सत्तू, मूली, काला जीरा, कचनार, खीरा, काला नमक, लौकी निषेध है।

श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन बनाने के नियम

  • श्राद्ध का खाने बनाते समय पूरी शुद्धता के साथ हर चीज साफ और स्वच्छ होनी चाहिए।
  • भोजन की शुद्धता के लिए साधारण नमक की बजाय सेंधा नमक का इस्‍तेमाल अच्‍छा माना गया है क्योंकि यह सबसे शुद्ध होता है।
  • श्राद्ध का खाना बनाते समय पूर्व की तरफ मुंह करके ही खाना बनाना चाहिए। दक्षिण की तरफ मुंह करके खाना बिल्कुल नहीं बनाना चाहिए।
  • चप्पल के बिना बनाए रसोईघर में श्राद्ध का भोजन। श्राद्ध का भोजन बनाते समय चप्‍पल (जूते) पहनने से बचना चाहिए। हां, आप लकड़ी की चप्‍पल पहनकर भोजन निर्माण कर सकते हैं क्‍योंकि लकड़ी को शुद्ध माना जाता है।
  • श्राद्ध में तुलसीतिल के प्रयोग से पितृगण प्रसन्न होते हैं। अतः श्राद्ध के भोजन आदि में इनका उपयोग जरूर करना चाहिए।

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श्राद्ध भोजन कराने के नियम

खासकर भोजन कराने से जुड़े कुछ ऐसे नियम हैं जिनका विशेष ध्यान रखना चाहिए। आईए, जानते हैं इन नियमों के बारे में….

  1. श्राद्ध के बाद ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन केले के पत्ते पर नहीं परोसा जाए। शास्त्रों के अनुसार इससे पितरों को तृप्ति नहीं मिलती है।
  2. सोने, चांदी, कांसे और तांबे के बर्तन ही श्राद्ध पर ब्राह्मण भोज के लिए सर्वोत्तम हैं। साथ ही श्राद्ध और तर्पण में लोहे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  3. श्राद्ध पर भोजन के लिए ब्राह्मणों को आमंत्रित कर और उन्हें दक्षिण दिशा में बैठाएं। मान्यता है कि दक्षिण में पितरों का वास होता है। हाथ में अक्षत, फूल, जल और तिल लेकर संकल्प कराएं।
  4. श्राद्ध में ब्राह्माण भोजन से पहले अग्नि को भाग जरूर करना चाहिए, इससे ब्राह्मण द्वारा किया गया भोजन सीधे पितरों को मिलता है, ब्रह्माराक्षस उसे दूषित नहीं कर पाते है।
  5. गाय, चींटी, कुत्ते, कौए और देवता को भोजन कराने के बाद ही ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
  6. ब्राह्मण देवता को दोनों हाथों से ही भोजन परोसें, एक हाथ से परोसा भोजन पितर को नहीं मिलता है।
  7. ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद उन्हें प्रणाम कर कपड़े, अनाज, दक्षिणा आदि दें और उनका आशीर्वाद लें।
  8. भोज और दान-दक्षिणा देने के बाद ब्राह्मणों को घर के द्वार तक पूरे सम्मान के साथ विदा करना चाहिए। मान्यता है कि ब्राह्मणों के साथ पितरों की भी विदाई होती है।
  9. ब्राह्मणों के भोजन के बाद ही स्वयं और अपने रिश्तेदारों को भोजन कराएं।
  10. बहन, दामाद और भांजा-भांजी को भी भोजन अवश्य कराएं। मान्यता है कि उनके भोजन के बिना पितर प्रसन्न नहीं होते।
  11. यही भी ध्यान रखे कि कुत्ते और कौए का भोजन, कुत्ते और कौए को ही खिलाया जाए। देवताओं और चींटी के नाम पर निकाले भोजन को गाय को खिलाया जा सकता है।
  12. श्राद्ध के दिन यदि कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण, अतिथि या साधु-सन्यासी घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए। पितृ पक्ष में अगर कोई भिक्षा मांगे तो उसे आदर के साथ भोजन कराएं।

ब्राह्मणों का आसन कैसा हो ?

  • रेशमी, ऊनी, लकड़ी, कुश जैसे आसन पर बैठाएं।
  • लोहे के आसन पर ब्राह्मणों को कभी न बैठाएं।

श्राद्ध पर भोजन ग्रहण करने आए ब्राह्मण के लिए खास नियम

  • श्राद्ध पर भोजन ग्रहण करने वाले ब्राह्मण को हमेशा मौन रहकर भोजन करना चाहिए। जरुरत पड़ने पर सिर्फ हाथों से संकेत देने चाहिए।
  • श्राद्ध भोज करते समय किसी भी ब्राह्मण को वहां परोसे गए भोजन की निंदा या प्रशंसा नहीं करनी चाहिए।
  • श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने आए ब्राह्मण से कभी भी भोजन कैसा बना है, यह सवाल नहीं पूछना चाहिए।
  • श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने के लिए बुलाए गए ब्राह्मण को कभी भी श्राद्ध के दिन दान नहीं देना चाहिए।
  • ब्राह्मण को भी ध्यान रखना चाहिए कि वो एक ही दिन में दो से तीन जगह श्राद्ध भोज ग्रहण करने न जाए।

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ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन करवाए बिना श्राद्ध कर्म अधूरा माना जाता है। इसलिए विद्वान ब्राह्मणों को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ भोजन कराने पर पितृ भी तृप्त होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

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(इस आलेख में दी गई श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है।)


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