जानिए 10 जनवरी पौष पूर्णिमा के चंद्र ग्रहण, Chandra Grahan 2020 की पूरी जानकारी, ग्रहण का सूतक काल, Timings, धार्मिक मान्‍यता, 2020 के ग्रहण, चंद्र ग्रहण को कैसे देख सकते हैं?, चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब लगेगा?, प्रयागराज में माघ मेले
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Chandra Grahan 2020: जानिए 10 जनवरी पौष पूर्णिमा के चंद्र ग्रहण की पूरी जानकारी, ग्रहण का सूतक काल


26 दिसम्बर को सूर्य ग्रहण लगने के साथ साल 2019 खत्म हुआ था, अब 10 जनवरी पौष पूर्णिमा के दिन साल 2020 का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2020) लगने जा रहा है, जो भारत देश में भी दिखाई देगा। हालांकि चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण (मांद्य चंद्र ग्रहण) होगा।

धार्मिक दृष्टि से पौष पूर्णिमा के दिन इस चंद्र ग्रहण पर दान पुण्य का खास महत्व होगा। 10 जनवरी (पौष पूर्णिमा) से प्रयागराज में माघ मेले की भी शुरुआत हो रही है जो 21 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। ऐसा भी माना जाता है कि पौष माह की पूर्णिमा पर स्नान और दान से मोक्ष की प्राप्ति होती है।


चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया सूर्य की रौशनी को ढक लेती है। यह चंद्र ग्रहण एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया में देखने को मिलेगा। यह चंद्र ग्रहण शुक्रवार, 10 जनवरी की रात 10 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर रात के 2 बजकर 42 मिनट तक चलेगा। आइए जानते हैं क्या होता है ये चंद्र ग्रहण, ग्रहण का सूतक काल और कहां -कहां दिखाई देगा यह चंद्र ग्रहण, धार्मिक मान्यताए।

Chandra Grahan 2020 Timings

चंद्रग्रहण शुरू होने का समय : 10 जनवरी 2020 की रात 10:39 से
ग्रहण काल का मध्‍य : 11 जनवरी 2020 की रात 00:38 am बजे
ग्रहण खत्म होने का समय : 11 जनवरी 2020 की रात 02:42 am बजे

कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण: अफ्रीका, एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया

चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब लगेगा?

10 जनवरी के चंद्र ग्रहण को लोग कंफ्यूज हैं कि इस चंद्र ग्रहण पर सूतक कब लगेगा? चंद्र ग्रहण लगने के 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार 10 जनवरी को लगने वाला चंद्र ग्रहण, मांद्य (उपछाया) चंद्र ग्रहण होगा।

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मांद्य यानी मंद पड़ने की क्रिया को कहते हैं। 10 जनवरी को होने वाले ग्रहण में चंद्रमा का छवि धूमिल होती प्रतीत होगी। चंद्रमा का करीब  90 प्रतिशत भाग मटमैला जैसा हो जाएगा। इस क्रिया में चंद्रमा का कोई भी भाग ग्रस्त नहीं होगा।

भारतीय ज्योतिशास्त्र और पंचांग के अनुसार उपछाया चंद्र ग्रहण को चंद्र ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। यही कारण है कि शुक्रवार, 10 जनवरी को लगने वाले इस चंद्र ग्रहण में सूतक काल नहीं होगा।

धार्मिक मान्‍यताओं में ग्रहण का महत्‍व

ग्रहण के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं, लेकिन धार्मिक मान्‍यताओं में ग्रहण का विशेष महत्‍व है। चंद्र ग्रहण को मंत्रों की सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। धार्मिक मान्‍यताओं में विश्‍वास रखने वाले लोग ग्रहण के वक्‍त शिव चालिसा का पाठ, महामृत्युंजय मंत्र, और भगवान का भजन कीर्तन कर सकते हैं।

साथ ही ग्रहण खत्‍म होने के बाद नहाकर गंगा जल से घर का शुद्धिकरण किया जाता है। फिर पूजा-पाठ कर दान-दक्षिणा देने का विधान है। ग्रहण के दौरान आटा, गेहूं, चावल, गुड़, चीनी, साबूत उड़दकाला तिल और काले वस्त्र जैसी चीजों का किसी जरूरतमंद को दान करना चाहिए। इससे खुशहाली आती है।

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चंद्र ग्रहण को कैसे देख सकते हैं?

चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं होती है। चंद्र ग्रहण पूरी तरह से सुरक्षित होता है इसलिए आप इसे खुली आंखों से देख सकते हैं, लेकिन यह एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण है जो कि खास सोलर फिल्टर वाले चश्मों (सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस) से ही देखा जा सकेगा। अगर आप Telescope की मदद से चंद्र ग्रहण देखेंगे तो आपको बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई देगा।

साल 2020 के ग्रहण

10 जनवरी – चंद्र ग्रहण
5 जून – चंद्र ग्रहण
21 जून – सूर्य ग्रहण
5 जुलाई – चंद्र ग्रहण
30 नवंबर -चंद्र ग्रहण
14 दिसंबर – सूर्यग्रहण (भारत में नहीं दिखेगा)

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(इस आलेख में दी गई Chandra Grahan 2020 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं, वैज्ञानिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)


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