Dhanteras 2019: धन लाभ के लिए धनतेरस के दिन इस शुभ मुहूर्त पर करें खरीददारी और उपाय, जानिए क्या खरीदें क्या ना खरीदें? धनतेरस 25 अक्‍टूबर 2019 शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा, Dhanteras 2019 मुहर्त, धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त, धनतेरस कैसे मनाया जाता है?, धनतेरस के दिन क्या खरीदें?, धनतेरस पूजा और मंत्र, धनतेरस पर करें ये उपाय - होगा धन लाभ, धनतेरस 2019 के दिन क्‍या सावधानियां बरतें?
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Dhanteras 2018: पूजा और कथा, धन लाभ के लिए करें ये उपाय, धनतेरस पर क्या खरीदें क्या ना खरीदें?


हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक के महीने के तेरहवें दिन और दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस मनाया जाता है। इस साल (Dhanteras 2018) धनतेरस 5 नवंबर 2018 के दिन मनाया जाएगा| धन की देवी के उत्सव, दिपावली की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है। इस दिन धन के देवता भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है|  धनतेरस को धन त्रयोदशीधन्वन्तरी त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है।

धनतेरस के दिन धन प्राप्ति के उपाय करने से धन के योग बनते हैं। धन प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ देवी-देवता माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर को माना जाता है। कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, कुबेर यदि कृपा दृष्टि बनाएं तो कोई भी व्यक्ति धन की प्राप्ति कर सकता है।


इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर के साथ भगवान धनवंतरी की पूजा भी की जाती है। घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहे इसलिए इस दिन इनकी पूजा की जाती है।  इसीलिए धनतेरस के दिन सोने-चांदी और बरतन खरीदना शुभ माना जाता है।

हिंदू इस दिन मृत्यु के देवता भगवान यम की भी पूजा करते हैं ताकि वे अपनी उदारता के लिए प्रार्थना कर सकें और समृद्धि की तलाश कर सकें। धनतरेस के दिन शाम को पूजा के बाद घर के द्वार पर दक्षिण दिशा में एक बड़ा दीपक जलाकर रखा जाता है, उस दीपक का नाता यम देवता है। इससे जीवन से अकाल मृत्यु का योग टल जाता हैं.

Dhanteras 2018 मुहर्त

धन तेरस तिथि – 5 नवंबर 2018, सोमवार

धनतेरस पूजन मुर्हुत – 18:05 बजे से 20:01 बजे तक

प्रदोष काल – 17:29 से 20:07 बजे तक

वृषभ काल – 18:05 से 20:01 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – 01:24 बजे, 5 नवंबर 2018

त्रयोदशी तिथि समाप्त – 23:46 बजे, 5 नवंबर 2018

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धनतेरस कैसे मनाया जाता है?

इस महान अवसर पर लोग अपने घर को पूरी तरह से सफाई करते हैं, घर को आंतरिक रूप से और बाहरी रूप से सजाते हैं। वे देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए रंगोली भी बनाते हैं। लोग मिट्टी के दिये भी जलाते हैं।

सूर्यास्त के बाद, लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा समृद्धि, ज्ञान के लिए करते हैं। वे गुलाब माला, मिठाई, फल, अगरबत्ती, कपूर आदि के साथ  उनकी पूजा-अभिषेक करते हैं। मां लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धनवंतरी की पूजा में कपूर जरूर जलाना चाहिए।

लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के नाम पर मंत्र जपते हैं, भजन और आरती भी गाते हैं। धनतेरस के दिन  के अनुसार किसी भी रूप में चांदी एवं अन्य धातु खरीदना ,बर्तन चांदी के लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति, कुबेर जी की प्रतिमा ,लक्ष्मी या श्री यंत्र ,कौड़ी और कमल गट्टाअति शुभ माना जाता है।

धनतेरस के दिन क्या खरीदें?

धनतेरस (Dhanteras 2018) के दिन हर घर में नई-नई चीज़ों को खरीदने की परंपरा रही है क्योंकि इस दिन घर में कुछ भी नया सामान लाना शुभ माना जाता है, खासकर, सोना-चांदी, बरतन, फर्नीचर और मशीनें। लेकिन धनतेरस के दिन भी इन्हें खरीदने का एक शुभ मुहूर्त होता है, जिस तरह हिन्दू धर्म में सभी कार्यों के लिए एक तिथि और समय निर्धारित होता है, ठीक वैसे ही धनतेरस के दिन भी घरों में नए सामान लाने का शुभ मुहूर्त है।

  1. धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और धातु का सामान खरीदना शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चांदी खरीदने से यश, कीर्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  2. माता लक्ष्मी को कौड़ियां, यंत्र और धनिया बहुत प्रिय बताया जाता है। इसीलिए धनतेरस के दिन कौड़ियां खरीदकर, दिवाली के दिन इनकी पूजा करके अपनी तिजोरी में रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से धन की हानि नहीं होती।
  3. धनतेरस के दिन आप साबुत धनिया खरीदकर लेकर आएं और इसे मां लक्ष्मी के सामने अर्पित करें। इससे आपकी सारी आर्थिक परेशानी दूर हो जाएगी।
  4. धनतेरस से दिवाली की शुरुआत हो जाती है। इसीलिए इस दिन ही दिवाली के दिन पूजी जाने वाली लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, खील-बताशे और मिट्टी के दीपक खरीदना अच्छा माना जाता है।
  5. धनतेरस के लिए धन की माता लक्ष्मी घर में आती हैं और वो सिर्फ साफ घर में ही प्रवेश करती हैं। इसीलिए इस दिन झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है।
  6. इन सबके अलावा लोग अपनी जरुरत के सामान जैसे फ्रिज, फर्नीचर, वॉशिंग मशीन और मिक्सर आदि भी खरीद सकते हैं।

धनतेरस के दिन क्या ना खरीदें?

  1. मान्यता है कि धनतेरस के दिन गाड़ी खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन इस दिन राहु काल रहता है और इस काल में वाहन खरीदना अच्छा नहीं होता।
  2. धनतेरस के दिन धारदार सामान जैसे कैंची, चाकू आदि नहीं खरीदना चाहिए।
  3. धनतेरस के दिन कांच का सामान नहीं खरीदना चाहिए।
  4. सिर्फ धनतेरस ही नहीं बल्कि हिंदु धर्म में सभी त्योहारों में काला रंग पहनना शुभ नहीं माना जाता है। इसीलिए धनतेरस के दिन भी काले रंग की चीज़े खरीदना avoid करें।

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धनतेरस पूजा और मंत्र

धनतेरस  में सबसे पहले शाम को यम दीप की पूजा की जाती है उसके बाद भगवान धन्वन्तरि की पूजा होती है और फिर गणेश लक्ष्मी की पूजा की जाती है।  मां लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धनवंतरी की पूजा में कपूर जरूर जलाएं।

इस दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए आप पूजा में पानसुपारीसाबुत धनियाबताशा और खील, दीया और कपूर शामिल कर सकते हैं .

दीपदान के समय इस मंत्र का जाप करते रहना चाहिए:

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।

त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यज: प्रीयतामिति॥

इस मंत्र का अर्थ है:

त्रयोदशी को दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दण्ड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनन्दन यम प्रसन्न हों। इस मंत्र के द्वारा लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होती हैं।

धनतेरस की कथा

कथा -1

शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन ही सागर मंथन से भगवान धनवंतरी हाथों में स्वर्ण कलश लेकर  उत्पन्न हुए।  कलश में भरे हुए अमृत से देवताओं को धनवंतरी ने अमर बना दिया।

देवी लक्ष्मी धनवंतरी के उत्पन्न होने के दो दिनों बाद माता लक्ष्मी प्रकट हुई। इसलिए धनतेरस का त्योहार दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है।

कथा -2

धनतेरस से  दूसरी कथा यह भी जुडी़ है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं के कार्य में बाधा डालने के कारण भगवान विष्णु ने असुरों के गुरू शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार,भगवान विष्णु ने वामन अवतार देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए उसके यज्ञ स्थल पर पहुंच गये।

शुक्राचार्य ने वामन रूप में भी विष्णु जी को पहचान लिया और राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे उन्हें इंकार कर देना। वामन साक्षात भगवान विष्णु हैं।

बलि ने उनकी बात नहीं मानी। वामन भगवान द्वारा मांगी गयी तीन पग भूमि, दान करने के लिए कमण्डल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। शुक्राचार्य राजा बलि के कमण्डल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर गये कि वह बलि को दान करने से रोक पाएं।

इससे कमण्डल से जल निकलना बंद हो गया। वामन भगवान शुक्रचार्य की चाल को समझ गये। भगवान वामन ने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमण्डल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गयी। शुक्राचार्य छटपटाकर कमण्डल से निकल आये। बलि ने संकल्प लेकर तीन पग भूमि दान कर दिया।

इसके बाद भगवान वामन ने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया, दूसरे से अंतरिक्ष को। तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं होने पर बलि ने अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठा। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुणा धन-संपत्ति देवताओं को मिल गयी। इस उपलक्ष्य में भी धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।

धनतेरस पर करें ये उपाय, होगा धन लाभ

  1. धनतेरस के दिन थोड़ा साबुत धनिया खरीदें। इसे संभालकर पूजा घर में रख दें। दीपावली की रात लक्ष्मी माता के सामने साबुत धनिया रखकर पूजा करें। अगले दिन प्रातः साबुत धनिया को गमले में या बाग में बिखेर दें, माना जाता है कि साबुत धनिया से हरा भरा स्वस्थ पौधा निकल आता है तो आर्थिक स्थिति उत्तम होती है।
  2. धनतेरस पर सूर्यास्त के बाद दीप जलाकर कौड़ियां रखें, धन कुबेर और देवी लक्ष्मी का पूजन करें। आधी रात के बाद 13 कौड़ियां घर के किसी कोने में गाड़ दें। अनायास ही अपार धन प्राप्ति के योग बनने लगेंगे।
  3. घर में चांदी के 13 सिक्के रखें और केसर व हल्दी लगाकर पूजन करें । इससे बरकत बढ़ेगी।
  4. धनतेरस पर 13 दीप घर के अंदर और 13 दीप घर के बाहर दहलीज और मुंडेर पर रखें।
  5. कुबेर यंत्र लाएं, उसे दुकान के गल्ले या तिजोरी में मंत्रो के साथ स्थापित करें। इससे धन संबंधी हर तरह की परेशानियों का अंत होगा।
  6.  मां लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धनवंतरी की पूजा में कपूर जरूर जलाना चाहिए। कपूर जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर जाती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है।
  7. धनतेरस के दिन पूजा में प्रयोग की गई सुपारी को तिजोरी में रखना लाभदायक होता है।

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(इस आलेख में दी गई Dhanteras 2018 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)


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