Guga Naumi, Goga Navami 2019, राजस्थान का लोक पर्व, होती है सांपों के देवता 'गोगा जी' की पूजा , Jahar Veer Goga,folk deity of Rajasthan, Goga Navami 2019: सर्पों के देवता 'गोगा जी' की पूजा विधि, जन्म कथा और महत्‍व. Goga Navami, गुग्गा नवमी is festival observed on the Bhardrapad month Shukl Paksha Navami tithi. Goga Navami 2019 is being celebrated on Saturday, Sept 07, 2019. This festival is dedicated to Lord Goga, who is the God of Snakes.
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Goga Navami – राजस्थान का लोक पर्व, होती है सांपों के देवता ‘गोगा जी’ की पूजा


Goga Navami is a Hindu festival observed on the ‘Navami’ (9th day) during the ‘Krishna Paksha’ (the dark fortnight of the Moon) of the month of  Bhadrapada in the Hindu calendar. Goga Navami 2018 will be celebrated on September 04, 2018. This festival is also popularly known as ‘Guga Naumi’ and is dedicated to worshipping Lord Goga, who is the God of Snake. गोगा नवमी के दिन नागों की पूजा करते हैं मान्यता है कि गोगा देवता की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है.

गोगा देवता जी  की पूजा श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन से आरंभ हो जाती है, यह पूजा-पाठ नौ दिनों तक यानी नवमी तक चलती है इसलिए इसे गुग्गा नवमी कहा जाता है. In Hindu traditions, Gogaji, also called as ‘Jahar Veer Goga (ज़ाहर वीर गोगा जी) is a popular folk deity of Rajasthan (राजस्थान के लोक देवता) who is worshipped with full devotion, immense fanfare and enthusiasm in the northern states of India, especially Rajasthan, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Uttar Pradesh, Himachal Pradesh, Haryana and Punjab.


In Rajasthan on Goga Navami, grand fairs are held and the festivities last for three days, as it is folklore (local festival) of Rajasthan State. गोगा/गुग्गा नवमी की ऐसी मान्यता है पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है.

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गोगा जी की जन्म कथा | Birth Story of Goga Ji

गोगा नवमी के विषय में एक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार गोगा मारु देश का राजा था और उनकी मां बाछला, गुरु गोरखनाथ जी की परम भक्त थीं| एक दिन बाबा गोरखनाथ अपने शिष्यों समेत बछाला के राज्य में आते हैं| रानी को जब इस बारत का पता चलता हे तो वह बहुत प्रसन्न होती है| इधर बाबा गोरखनाथ अपने शिष्य सिद्ध धनेरिया को नगर में जाकर फेरी लगाने का आदेश देते हैं| गुरु का आदेश पाकर शिष्‍य नगर में भिक्षाटन करने के लिए निकल पड़ता है| भिक्षा मांगते हुए वह राजमहल में जा पहुंचता है तो रानी योगी बहुत सारा धन प्रदान करती हैं, लेकिन शिष्य वह लेने से मना कर देता है और थोडा़ सा अनाज मांगता है|

रानी अपने अहंकारवश उससे कहती है की राजमहल के गोदामों में तो आनाज का भंडार लगा हुआ है तुम इस अनाज को किसमें ले जाना चाहोगे तो योगी शिष्य अपना भिक्षापात्र आगे बढ़ा देता है| आश्चर्यजनक रुप से सारा आनाज उसके भिक्षा पात्र में समा जाता है और राज्य का गोदाम खाली हो जाता है किंतु योगी का पात्र भरता ही नहीं| तब रानी उन योगीजन की शक्ति के समक्ष नतमस्तक हो जाती है और उनसे क्षमा याचना की गुहार लगाती है.

रानी योगी के समक्ष अपनी कोई संतान न होने का दुख बताती है| शिष्य योगी, रानी को अपने गुरु से मिलने को कहता है जिससे उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान प्राप्त हो सकता है| यह बात सुनकर रानी अगली सुबह जब वह गुरु के आश्रम ‘गोगामेडी’ जाने को तैयार होती है तभी उसकी बहन काछला वहां पहुंचकर उसका सारा भेद ले लेती है और गुरु गोरखनाथ के पास पहले पहुंचकर उससे दोनो फल ग्रहण कर लेती है|

परंतु जब रानी उनके पास फल के लिए जाती है तो गुरू सारा भेद जानने पर पुन: गोरखनाथ रानी को एक गुगल नामक फल प्रसाद के रूप में प्रदान करते हैं और आशिर्वाद देते हें कि उसका पुत्र वीर तथा नागों को वश में करने वाला तथा सिद्धों का शिरोमणि होगा| इस प्रकार रानी को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है , गुगल फल के नाम से उस बालक का नाम गोगा रखा जाता है|

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गोगा नवमी पूजा | Goga Navami Pooja

यह पर्व बहुत ही श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। गोगा नवमी पर्व आठ दिन तक मनाया जाता है और नवें दिन गोगा नवमी को गोगाजी मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है और प्रसाद के रूप रोट और चावल-आटा चढ़ाते हैं| भक्त लोग कथा का श्रवण करते हैं तथा नाग देता की पूजा अर्चना करते हैं| गोगा नवमी की ऐसी मान्यता है पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है.

इस अवसर पर बाबा जाहरवीर (गोगाजी) के भक्त अपने घरों में ईष्टदेव की वेदी भी बनाकर अखंड ज्योति जागरण कराते हैं तथा गोगा देवजी की शौर्य गाथा एवं जन्म कथा सुनते हैं। कहा जाता है की श्री जाहरवीर गोगादेवजी सभी मनोकामनाए पूर्ण करते है| आज नवमी तिथि का दिन जाहरवीर की जोत कथा के नाम से भी जाना जाता है

इस दिन भक्त घरो में जहारवीर पूजा और हवन करने के साथ ही खीर और पुआ का भोग लगाया जाता है. लोग अपनी अपनी मनोकामनाओ की पूर्ति के लिये भी पूजा करते है| कई स्थानों पर इस दिन मेले लगते हैं व शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।

गोगा नवमी की पूजा कैसे करें | Goga Navami Puja Vidhi

भादवा बदी नवमी को सुबह जल्दी उठ नहा धोकर खाना बना लें| खीर, चूरमा, गुलगुले आदि बनाकर जब मिट्टी की मूर्तियां लेकर महिलाएं आती हैं तो इनकी पूजा होती है| रोली, चावल से टीका कर बनी हुई रसोई का भोग लगाएं| गोगाजी के घोड़े के आगे दाल रखी जाती है और रक्षाबंधन की राखी खोल कर इन्हें चढ़ाई जाती है, कहा जाता है कि रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों को जो रक्षासूत्र (राखी) बांधती हैं वह गोगा नवमी के दिन खोल कर गोगा देवजी जी महाराज को चढ़ा दिए जाते हैं.

कई जगह तो गोगा जी की घोड़े पर चढ़ी हुई वीर मूर्ति होती है और कई जगह गोगाजी की मिट्टी की मूर्ति बनाई जाती है| आज भी गांवों में पूजा करने और उनका चढ़ावा लाने का काम कुम्हार समुदाय के लोग करते हैं| जगह-जगह इनकी पूजा के तरीके में अंतर तो जरूर है पर विश्व भर में जहां भी राजस्थानी रहते हैं, वहां सब जगह इनकी पूजा होती है |

इस दिन गोगाजी का प्रिय भजन गाया जाता है

भादवे में गोगा नवमी आगी रे, भगता में मस्ती सी छागी रे,

गोगा पीर दिल के अंदर, थारी मैडी पे मैं आया,

मुझ दुखिया को तू अपना ले, नीला घोड़े आळे।

मेरे दिल में बस गया है गोगाजी घोड़ेवाला,

वो बाछला मां का लाला वो है, नीला घोड़े वाला,

दुखियों का सहारा गोगा पीर।

इस तरह के कई भजन और गीत गाकर गोगा देव का गुणगान किया जाता है।

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Significance of Goga Navami |गोगा नवमी का महत्व

Goga Navami is one of the significant Hindu festivals celebrated in honour of Gogaji. As per the legends, Goga is known as a powerful Rajput prince who possessed supernatural powers to control venomous snakes.

Hindus believe that by worshipping him on this day will protect them from snakes and other evils. Moreover, there is also a popular belief that Lord Goga protects children from all harm. Hence, married women perform puja on Goga Navami and pray to Him for the well-being and long life of their children. Some childless married women also pray on this day to be blessed with progenies.

गोगा नवमी के संबंध में यह मान्यता है कि पूजा स्थल की मिट्टी को घर में रखने से सर्पभय नहीं रहता है। ऐसा माना जाता है कि वीर गोगा देव अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

गोगा देवजी जी महाराज की जय..!!

 

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