Hindu Nav Varsh: हिंदू नववर्ष 2076 का आगाज, क्यों है खास और क्या है महत्व
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हिंदू नववर्ष 2076 का आगाज, क्यों है खास और क्या है महत्व?


Hindu Nav Varsh 2076: यूं तो पाश्चात्य सभ्यता की तर्ज पर नया साल 1 जनवरी को मनाते हैं लेकिन हिंदू धर्म के अनुसार हिंदू नववर्ष (Hindu New Year) 1 जनवरी को नहीं बल्कि चैत्र (Chaitra) महीने की पहली तिथि यानि चैत्र प्रतिपदा को मनाया जाता है। हिंदू नववर्ष 2076, इस बार 6 अप्रैल, चैत्र नवरात्र को मनाया जा रहा हैं। हिन्दू नव वर्ष पूरे देश में बड़े उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। देशभर में ये कई नाम जैसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि से जाना जाता है जिसके अनुसार ये एक नए साल की शुरूआत है। नया संवत्सर यानी नया हिंदू नववर्ष 2076 का नाम परिधावी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हिंदू नववर्ष के राजा शनि हैं और मंत्री सूर्य हैं।

हिन्दू धर्म के लोग अपने साल भर में आने वाले सभी त्यौहार इसी नववर्ष के अनुसार मनाते है। हिंदू कैलेंडर जिसे पंचांग कहते हैं उसके अनुसार ही सभी शुभ काम भी किए जाते हैं। मान्यता है कि चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा के दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, इसी कारण से इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। हिंदू नववर्ष का आरंभ विक्रमादित्य ने किया था, अतः इसको विक्रम संवत भी कहा जाता है। हिंदू नववर्ष के पहले दिन को नव संवत्सर या विक्रम संवत भी कहकर बुलाते हैं।


हिंदू नववर्ष का क्या है महत्व?

हिंदू नववर्ष के महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी हम अपने व्रत एवं त्यौहार हिंदू कैलेंडर और हिंदू तिथियों के आधार पर ही मनाते हैं। घर में शादी हो या फिर कोई और शुभ कार्य सभी कुछ हिंदू कैलेंडर या पंचांग देखकर ही किए जाते हैं। लोग हिंदू नववर्ष पर एक दूसरे को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और साथ ही नए कामों की शुरूआत भी इसी दिन से करते है।

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कैसे मनाते है हिन्दू नववर्ष?

यूं तो हिंदू नववर्ष हर साल चैत्र प्रतिपदा से ही शुरू हो जाता है लेकिन भारत में लोक मान्यताओं और स्थानीय रीति रिवाज़ों में थोड़ी भिन्नता होने के चलते हिन्दू नववर्ष का पर्व अलग अलग नामो से मनाया जाता हैं।

  • उत्तर में हिन्दू नववर्ष को नवरात्र के रूप में मनाया जाता है।
  • महाराष्ट्र मे चैत्र प्रतिपदा से ही हिंदू नववर्ष का आगाज़ होता है जिसे गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है।
  • दक्षिण में माना जाता है कि इस दिन प्रभु श्रीराम ने बालि का वध कर दक्षिण भारत में रहने वाले लोगों को उसके आतंक से मुक्त करवाया था। गोवा और केरल में इसे संवत्सर पड़वो कहते हैं तो कर्नाटक में इसे युगादि कहते हैं और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उगादी

भारत मे हर जगह अलग-अलग तरीके व नाम से हिन्दू नववर्ष मनाया जाता है।

भुला दो बीता हुआ कल,
दिल में बसो आने वाला कल,
हंसो और हंसाओ, चाहे जो भी पल,
खुशियां ले कर आयेगा आने वाला कल !
हिन्दू नववर्ष 2076 की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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