Kamada Ekadashi 2019: जानिए कामदा एकादशी व्रत विधि, कथा और महत्व।हिंदू संवत्सर की पहली एकादशी और चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे फलदा एकादशी भी कहते हैं। is साल Kamada Ekadashi 2019, सोमवार, 15 अप्रैल को है।
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Kamada Ekadashi 2019: जानिए कामदा एकादशी व्रत विधि, कथा और महत्व


Kamada Ekadashi 2019: हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने में दो बार एकादशी आती है। हिंदू संवत्सर की पहली एकादशी और चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे फलदा एकादशी भी कहते हैं। इस साल Kamada Ekadashi 2019, सोमवार, 15 अप्रैल को है। यह एकादशी चैत्र नवरात्रि के बाद पहली एकादशी है। विष्णु पुराण के अनुसार मान्यता है कि कामदा एकादशी का व्रत रखने व्रती को प्रेत योनि से भी मुक्ति मिल जाती है।

शास्त्रों में काम, क्रोध और लोभ, इन तीन को मनुष्यो के दुखो का मूल कारण माना गया है। काम पीड़ित होने पर व्यक्ति के अंदर अच्छे बुरे का फर्क करने की क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे ही पापों से मुक्ति के लिए शास्त्रों में चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने का विधान है।


Kamada Ekadashi 2019 Shubh Muhurat

एकादशी तिथि आरंभ- 15 अप्रैल 2019 को 07:08 बजे

एकादशी तिथि समाप्त- 16 अप्रैल 2019 को 04:22 बजे

पारण (व्रत तोड़ने) का समय 16 अप्रैल 2019 को 05:58 से 08:31

पारण तिथि के दिन हरि वास समाप्त होने का समय- 09:39

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कामदा एकादशी व्रतविधि

एकादशी और सोमवार का योग होने से भगवान विष्णु के साथ ही भगवान शिव की भी पूजा करनी चाहिए। एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और घर में ही भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें।

स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। शिव मंदिर जाएं और तांबे के कलश से शिवलिंग  पर जल चढ़ाएं, काले तिल चढ़ाएं।

इस व्रत में मन को संयमित रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें और दैनिक कार्य करते हुए मन में भगवान को याद करते रहें। कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु को फल, फूल, दूध, पंचामृत, तिल, धूप, नैवेद्य आदि सामग्री से पूजन करना शुभ होता है। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति को दिनभर अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए, एक समय फलाहार कर सकते हैं।

विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें। कामदा एकादशी व्रत की कथा सुनें। दूसरे दिन यानी द्वादशी तिथि (16 अप्रैल, मंगलवार) को ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

अत: ब्राह्मणों को भोजन करवाकर विदा करने के बाद ही भोजन करें। इस प्रकार जो चैत्र शुक्ल पक्ष में कामदा एकादशी का व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।

कामदा एकादशी व्रत कथा

विष्णु पुराण के अनुसार प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगर था। वहां पुण्डरीक नामक राजा राज्य करते थे। इस नगर में अनेक अप्सरा, किन्नर और गंधर्व का भी वास था। एक दिन ललित नाम का गन्धर्व दरबार में गान कर रहा था कि अचानक उसे पत्नी ललिता की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय और ताल तीनों बिगड़ने लगे। इस गलती को जानकर राजा पुण्डरीक को बड़ा क्रोध आया और ललित को राक्षस बन जाने का श्राप दे दिया।

ललिता को जब यह पता चला तो वह अत्यंत दुःखी रहने लगी। वह श्रृंगी ऋषि के आश्रम में जाकर प्रार्थना करने लगी। श्रृंगी ऋषि ललिता के दुःख को जानकर चैत्र शुक्ल एकादशी जिसका नाम ‘कामदा एकादशी’ है, का व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने ऋषि के बताए नियम के अनुसार व्रत पूरा किया। इसके बाद व्रत का पुण्य फल अपने पति ललित को दे दिया। इससे ललित वापस राक्षस से गंधर्व रुप में लौट आया। इस व्रत के पुण्य से ललित और ललिता दोनों को उत्तम लोक में भी स्थान प्राप्त हुआ।

कामदा एकादशी का महत्व

  • धर्म ग्रंथों के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत के पुण्य से जीवात्मा को पाप से मुक्ति मिलती है।
  • यह एकादशी कष्टों का निवारण करने वाली और मनोवांछित फल देने वाली, कामना पूर्ण करने वाली कही जाती है।
  • इस दिन गंगा स्नान करने, व्रत, पूजा-पाठ करने एवं ब्राह्मणों को दान करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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Kamada Ekadashi 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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(इस आलेख में दी गई Kamada Ekadashi 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं।)


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