Margashirsha Amavasya 2019: पितृ दोष दूर करने के लिए क्या करे? जानिए मार्गशीर्ष अमावास्या व्रत,पूजा विधि व महत्व, यह अमावस्या 26 नवंबर, दिन मंगलवार को है। इस अमावस्या को अगहन अमावस्या या श्राद्धादि अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, जिसका महत्व अत्यधिक माना गया है।
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Margashirsha Amavasya 2018: मार्गशीर्ष अमावास्या का महत्व, पूजा करने से दूर होता है पितृ दोष


Margashirsha Amavasya 2018: मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या या श्राद्धादि अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मार्गशीर्ष अमावस्या कहते हैं। मार्गशीर्ष माह में मां लक्ष्मी की खास पूजा होती है। Margashirsha Amavasya 2018, 7 दिसंबर को है। हिन्दू धर्म में अमावस्या का खास महत्व है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन माना गया है।

जिस प्रकार पितृपक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, ठीक उसी प्रकार कहा जाता हैं कि मार्गशीर्ष माह की अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त व्रत रखने और जल से तर्पण करके सारे पितरों को प्रसन्न किया जा सकता हैं। पौराणिक शास्त्रों  के अनुसार इस दिन पूजा करने से पितृदोष का निवारण होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।


लेकिन चूंकि मार्गशीर्ष माह के बारे में स्वयं श्री कृष्ण कहते हैं कि महीनों में वह मार्गशीर्ष हैं इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है। जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी का पूजन कर दीपावली बनाई जाती है, उसी प्रकार इस दिन भी देवी लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है। ऐसी मान्यता है कि अगहन मास की अमावस्या पर लक्ष्मी पूजन और व्रत करने से पापों का नाश होता है। अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्य सम्पन किए जाते हैं।

Margashirsha Amavasya 2018 Date and Timings

मार्गशीर्ष अमावस्या, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार साल 2018 में यह तिथि 7 दिसंबर को शुक्रवार के दिन है।

  • Margashirsha Amavasya Date – 7 दिसंबर 2018
  • मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि का आरंभ– 6 दिसंबर को 12 बजकर 12 मिनट से होगा ।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या समाप्त का समापन– 7 दिसंबर को 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी ।

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मार्गशीर्ष अमावस्या पूजा विधि

  • कहा जाता हैं कि मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय यमुना नदी में स्नान करने से महा पुण्यफल की प्राप्ति होने के साथ जीवन से दुख भी दूर हो जाते हैं।
  • इस अमावस्या के दिन व्रत उपवास रखने के साथ भगवान श्री सत्यनारायाण भगवान की कथा का पाठ भी करना चाहिये ।
  • जो भी इस दिन विधि विधान से यह पूजा करते हुए व्रत रखता हैं, दान-दक्षिणा देता हैं उसके सारे पाप कर्म भी नष्ट हो जाते हैं, और वह भगवान की कृपा का अधिकारी बन जाता हैं ।
  • शाम के समय शिवालय जाकर शुद्ध घी का दीपक जलाएं तथा घर के मंदिर में दीप जलाकर भगवान का पूजन-अर्चन करें।

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व

ऐसी मान्यता है कि सत युग में देवों ने मार्ग-शीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष का प्रारम्भ किया था। मार्गशीर्ष अमावस के दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि प्रत्येक धर्म कार्य के लिए अक्षय फल देने वाली बताई गई है, पर पितरों की शान्ति के लिए अमावस्या व्रत पूजन का विशेष महत्व है।

  • मान्यता के अनुसार इस दिन पूजन और व्रत से पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष दूर होता है।
  • विष्णु पुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अगहन माह की अमावस्या के व्रत से न केवल पितृगण अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रूद्र, अश्विनीकुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षियों सहित सब भूत-प्राणी भी तृप्त होते हैं।
  • जो लोग अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति, सदगति के लिए कुछ करना चाहते है उन्हें इस माह की अमावस्या को उपवास रख, पूजन कार्य करना चाहिए।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या का व्रत करने कुंडली के दोष दूर होते हैं। अगर किसी के भाग्य स्थान में राहू नीच का होकर परेशान कर रहा हो तो, मार्गशीर्ष अमावस्या करना लाभकारी होता है।
  • इस अमावस्या को गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है।
  • अगर किसी की कुण्डली में पितृ दोष हो, उनको यह उपवास जरूर रखना चाहिए।
  • ऐसी मान्यता है कि जो लोग संतान सुख से बंचित हैं, उन्हें यह अमावस्या व्रत जरूर करना चाहिए।
  • जो लोग यह अमावस्या व्रत करते है उन्हें मनवांछित फल प्राप्त होता है, रुके हुए काम हो जाते हैं और कार्य की कठिनाइयां खत्म हो जाती हैं।
  • अगहन माह में ही भगवान कृष्ण ने गीता का दिव्य ज्ञान दिया था, जिसके कारण से इस माह की अमावस्या तिथि को अत्यधिक लाभकारी और पुण्य फलदायी मानी जाती है।

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(इस आलेख में दी गई Margashirsha Amavasya 2018 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)


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