Falgun 2019: हिंदू पंचाग का अंतिम माह फाल्गुन आरंभ, जानिए प्रमुख त्योहार और Phalguna 2019 महत्व
Culture Festivals

Falgun 2019: हिंदू पंचाग का अंतिम माह फाल्गुन, जानिए प्रमुख त्योहार और महत्व


Falgun 2019 बुधवार 20 फ़रवरी से प्रारम्भ हो गया है। फाल्गुन महीना, हिंदू पंचांग का बारहवां और आखिरी महीना होता है और उत्सव के उल्लास से भरा हुआ रहता है। यह महीना भगवान शिव, भगवान श्री कृष्ण और चंद्रदेव के उपासना का हैं। फाल्गुन महीने में महाशिवरात्रि और होली जैसे महत्वपूर्ण और बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। फाल्गुन माह की समाप्ति 21 मार्च 2019 गुरुवार को होगी।

हिन्दू कैलेण्डर के हिसाब से इस बार महाशिवरात्रि 4 मार्च को, वहीं होलिका दहन 20 मार्च को और 21 मार्च को होली खेली जाएगी। इसकी के साथ ही फाल्गुन महीना खत्म हो जाएगा और हिन्दू कैलेण्डर का पहला महीना चैत्र शुरू हो जाएगा।


फाल्गुन ईस्वी कलेंडर के अनुसार फ़रवरी- मार्च माह में पड़ता है, इसे वसंत ऋतु का महीना भी कहा जाता है, क्योंकि इस समय भारत में न तो अधिक गर्मी होती है और न अधिक सर्दी। यह हिंदू वर्ष का अंतिम महीना होता है इसलिए अधिकांश धार्मिक वार्षिकोत्सव इसी माह में होते हैं।

इस पूरे महीने भर में चंद्रदेव के साथ-साथ भोलेनाथ, भगवान श्री कृष्ण की उपासना विशेष फलदायी होती है। ज्योतिष के अनुसार यदि फाल्गुन द्वादशी युक्त श्रवण नक्षत्र से प्रारंभ हो तो इस दिन भगवान विष्णु का उपवास करने की मान्यता भी है।

चंद्र देव का जन्‍म माह

फाल्‍गुन मास चंद्र देव की आराधना के लिए सबसे उपयुक्‍त माना गया है, क्‍योंकि ऐसी मान्यता भी है कि चंद्रमा की उत्पति महर्षि अत्रि और उनकी पत्नी अनुसूया की संतान के रूप में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को ही हुई थी। इस माह को चंद्रमा का जन्‍म माह माना जाता है.

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार चंद्र का दिन सोमवार है और उन्‍हें जल तत्‍व का देव भी कहा जाता है। चंद्रमा का जन्‍म फाल्‍गुन मास में होने के कारण इस महीने चंद्रमा की उपासना करने का विशेष महत्‍व है। इसी लिए इसी माह में समारोह पूर्वक चंद्रोदय की पूजा भी की जाती है।

ये पढ़ेंभगवान शिव और उनका अनोखा घर-संसार, शिवालय का तत्त्व-रहस्य

शिव और कृष्ण दोनों की उपासना

फाल्गुन के महीने में महाशिवरात्रि व होली जैसे पर्व होते हैं इस कारण इस मास का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। एक ओर इसमें भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है तो दूसरी तरफ भगवान द्वारा अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के कारण होलिका दहन के साथ होली का रंगों उत्सव भी मनाया जाता है। होली का त्योहार भेदभाव को भूलाकर साथ चलने की हमारी सांस्कृतिक एकता के महत्व को भी दर्शाता है।

Falgun 2019 के प्रमुख व्रत और त्यौहार

  • यशोदा जयंती- फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाया जाता है। इस वर्ष ये पर्व 24 फरवरी 2019, रविवार को है।
  • शबरी जयंती- फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि (इस बार 25 फरवरी) को शबरी जयंती मनाई जाती है।
  • सीता अष्‍‍‍‍‍टमी-  फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता सीता अष्‍‍‍‍‍टमी यानी जानकी जयंती मनाई जाती है। इस साल ये तिथि 26 फरवरी, मंगलवार को पड़ेगी।
  • विजया एकादशी-  2 मार्च, मान्यता है कि इस माह की विजया एकादशी का महत्व भगवान श्रीराम से जुड़ा है। इस दिन भगवान वासुदेव की पूजा भी की जाती है।
  • महाशिवरात्रि – इस महीने में 4 मार्च को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को सर्मपित शिवरात्री मनाई जाती है।
  • आमलकी एकादशी- फाल्गुन की शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है।
  • फाल्गुन पूर्णिमा20 मार्च, चन्द्रमा की उत्पत्ति का दिन होने के कारण उसकी उपासना होती है।
  • होली– 20 मार्च, हिंदू पंचांग के अनुसार ये पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होलिका उत्सव को फाल्गुनिका के नाम से भी जाना जाता है।

होलाष्टक कब से?

आगामी 14 मार्च से होलाष्टक शुरू होते ही मांगलिक काम नहीं किए जाएंगे। 20 मार्च को होलिका दहन के साथ होलाष्टक खत्म हो जाएगा।

फाल्गुन 2019 में शादी के मुहूर्त

ज्योतिष गणना के अनुसार फाल्गुन महीने यानी फरवरी-मार्च में 5 दिन विवाह के लग्न मुहूर्त हैं। इसी कड़ी में 21 फरवरी, 7, 8, 9 और 12 मार्च को विवाह मुहूर्त है। इस दौरान 8 मार्च को फुलेरा दूज होने कारण विवाह आदी मांगलिक कामों के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा। कुछ विद्वानों के अनुसार इसमें सूर्य, गुरु आदि का बल देखने की आवश्यकता नहीं रहती, इसे स्वयंसिद्ध मुहूर्त कहा गया है।

वहीं मीन संक्रांति होनेे के कारण यानी सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने से, 14 मार्च से विवाह और अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाएंगे।  मीन संक्रांति के कारण 14 अप्रैल के बाद ही मांगलिक कामों की शुरुआत हो पाएगी।

यह भी पढ़ें: Jaya Ekadashi 2019: जया एकादशी व्रत कथा, पूजन विधि और महत्व

ज्योतिष तंत्र साधना

तंत्र ज्‍योतिष में तो ये कहावत है कि चंद्रमा का पृथ्वी से ऐसा नाता है कि मानो मां-बेटे का संबंध हो, जैसे बच्‍चे को देखकर मां के दिल में हलचल होने लगती है, ठीक वैसे ही चंद्रमा को देखकर पृथ्वी पर हलचल होने लगती है। वहीं भारतीय तंत्र शास्‍त्र इसे शक्तियां अर्जित करने का समय मानता है। आकाश में पूरा चांद निकलते ही कई तांत्रिक सिद्धियां प्राप्‍त करने में जुट जाते हैं।

ये होता है परिवर्तन:

ज्‍योतिष शास्‍त्र इसके संबंध में कहता है कि चंद्रमा का आकर्षण पृथ्वी पर भूकंप, समुद्री आंधियां, तूफानी हवाएं, अतिवर्षा, भूस्‍खलन आदि लाता है। रात को चमकता पूरा चांद मानव सहित जीव-जंतुओं पर भी गहरा असर डालता है। शास्‍त्रों के अनुसार चंद्रमा मन का स्‍वामी है।मनुष्‍य का मन और समुद्र से उठने वाली लहरें दोनों का ही निर्धारण चंद्रमा से ही होता है।

फाल्गुन महीने का महत्व 

फाल्गुन का महीना आते ही वातावरण रंगीन हो जाता है। खेतों में पीली सरसों लहलहाती है, पेड़ों पर पत्तों की हरी कोपलें और पलाश के केसरिया फूल दिखाई देने लगते हैं। ये माह हमें सिखाता है कि हमेशा सकारात्मक सोचें चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो। जैसे पेड़ों के पत्ते झड़ने के बाद नए पत्ते आते हैं। वैसे जीवन में दुख के बाद सुख भी आते हैं।

इस माह की पूर्णिमा को फाल्‍गुनी नक्षत्र में होने के कारण इस माह का नाम फाल्‍गुन पड़ा है। इस महीने चंद्रमा के पूजन के साथ-साथ खान-पान और अपनी जीवनचर्या में बदलाव करके भोजन में अनाज का प्रयोग कम करना चाहिए और मौसमी फलों का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए। इस माह में होली और शिवरात्रि का महापर्व भी मनाया जाता है, इसके चलते भी फाल्गुन मास का विशेष महत्‍व है।

और पढ़ें: स्वाइन फ्लू का कहर: Swine Flu Symptoms, Vaccine And Treatment

Falgun 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं !!

Connect with us through Facebook also for regular updates on DharmaDo comment below for any more information or query on Falgun 2019.

(इस आलेख में दी गई Falgun 2019 की जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

About the author


Leave a Reply