सोमवती अमावस्या और शनि जयंती, क्या करें कि जीवन में शुभता आए: सोमवार को aane वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते है। हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या स्नान, दान के लिए शुभ और विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इस बार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या और शनि जयंती ka संयोग 3 जून, 2019 को बन रहा है।
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सोमवती अमावस्या और शनि जयंती, क्या करें कि जीवन में शुभता आए?


सोमवती अमावस्या और शनि जयंती: सोमवार को आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते है। हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या स्नान, दान के लिए शुभ और विशेष धार्मिक महत्व रखती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ महीने की अमावस्या सोमवार को ही पड़ रही है। इस बार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या और शनि जयंती का विशेष संयोग 3 जून 2019 को बन रहा है।

ऐसा संयोग 149 वर्ष बाद बनने जा रहा है। इससे पहले यह संयोग 30 मई 1870 को बना था। शनि जयंती के दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी है। इस दिन पूजा पाठ, दान करने से विशेष प्रकार का पुण्य फल मिलेगा। इसके साथ 3 जून 2019 को ही वट सावित्री का व्रत भी रखा जाएगा।


एक दिन में तीन शुभ आयोजन होने के चलते इस दिन का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। इस दिन पूर्वजों के लिए तर्पण किया जाता है और पीपल, तुलसी और वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करते हुए भगवान विष्णुभगवान शिव तथा पीपल वृक्ष की पूजा करनी चाहिए।

अमावस्या कब से शुरू होगी?

दो जून को शाम 4 बजकर 39 मिनट से सोमवती अमावस्या शुरू हो जाएगी। जोकि तीन जून को दोपहर 3 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी।

अमावस्या आरंभ : 4.39 बजे (दो जून)
अमावस्या समाप्त : 3. 31 बजे (तीन जून)

ज्येष्ठ माह की अमावस्या का महत्व

  1. ज्येष्ठ अमावस्या को न्याय प्रिय शनि देव की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
  2. ज्येष्ठ मास की  अमावस्या को अपने पूर्वजों की पूजा करने और गरीबों को दान देने से पापों का नाश होता है।
  3. इस दिन बहुत से श्रद्धालू पवित्र जल में स्नान करके व्रत भी रखते है। बहुत से लोग इसे स्नान-दान की अमावस्या के रूप में भी मनाते हैं।
  4. महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए वट सावित्री व्रत भी रखती हैं।
  5. उत्तर भारत में तो ज्येष्ठ अमावस्या को विशेष रूप से सौभाग्यशाली एवं पुण्य फलदायी माना जाता है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है।

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शनि जयंती का महत्व

  1. माना जाता है कि इस दिन सूर्य देवदेवी छाया के पुत्र शनिदेव का जन्म हुआ था।
  2. शनि देव कर्मदातान्याय प्रिय देव हैं। जिन राशियों में और जिन जातकों की कुंडली में शनि की महादशा, अंतर्दशा, ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है, उनके लिए इस अद्भुत संयोग में भगवान शनि की पूजा करना लाभदायक होगा और शनि दोष से मुक्ति मिलती है। पूजा करने के दौरान भगवान शनि मंत्र की माला का जाप करना चाहिए।
  3. शनि दोष से बचने के लिये इस दिन शनिदोष निवारण के उपाय करने से जल्दी लाभ मिलता है।
  4. काली उड़द की दाल, तिल, लौह, काले कपड़े आदि का दान देना चाहिए।

सोमवती अमावस्या का महत्त्व

  1. स्नान, दान के लिए सोमवती अमावस्या शुभ और सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस पर्व पर किए गए तीर्थ स्नान और दान से बहुत पुण्य मिलता है।
  2. सोमवार को अमावस्या का संयोग कम ही बनता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार पाण्डव पूरे जीवन तरसते रहे, परंतु उनके जीवन में सोमवती अमावस्या नहीं आई।
  3. इस दिन पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान, गौदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र, स्वर्ण आदि दान का विशेष महत्त्व माना गया है।
  4. निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार इस दिन स्नान-दान और ब्राह्मण भोजन करवाने से हजारों गायों के दान का पुण्य फल प्राप्त होता है।
  5. सोमवार चंद्रमा का दिन हैं। इस दिन (प्रत्येक अमावस्या को) सूर्य तथा चंद्र एक ही राशि में स्थित रहते हैं। इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य देने वाला होता है।

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ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या पर क्या करें?

  1. सोमवती अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठें और तीर्थ स्थान या पवित्र नदी में स्नान करें। नही तो अपने स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. सोमवती अमावस्या पर अपने स्नान के जल में थोड़ी सी दूर्वा और काला तिल डालकर स्नान करने से नव ग्रहों की शांति होती है।
  3. घर में साफ सफाई करने के बाद गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें।
  4. सोमवती अमावस्या के दिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करने से दरिद्रता दूर होती है।। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।
  5. सुबह जल्दी एक स्टील के लोटे में साफ जल, कच्चा दूध, गंगाजल, अक्षत और पुष्प मिलाकर पीपल के वृक्ष की जड़ में दाएं हाथ से दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके अर्पण करें । ऐसा माना गया है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी तथा अग्रभाग में ब्रह्माजी का निवास होता है। अत: इस दिन पीपल के पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है।
  6. पीपल और वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करते हुए भगवान विष्णु तथा पीपल वृक्ष की पूजा करनी चाहिए, इससे दरिद्रता मिटती है।
  7. सोमवार को भगवान शिवजी का दिन माना जाता है। इसलिए सोमवती अमावस्या पर शिवजी की आराधना, पूजन-अर्चना की जाती है। सुहागन महिलाएं पीपल के वृक्ष में शिवजी का वास मानकर, पति की लंबी आयु की कामना करते हुए उसकी पूजा और परिक्रमा करती हैं।
  8. तुलसी के पौधे की 108 बार प्रदक्षिणा करने से भी मनचाही आर्थिक समृद्धि मिलती है।
  9. माना जाता है कि सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहने के साथ ही दान करने से हजार गायों के दान करने के समान फल मिलता है। श्रद्धा के अनुसार दान करे, गरीबों को भोजन कराए।
  10. सोमवार और अमावस्या के संयोग पर उपवास करते हुए पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनि मंत्र का जाप करना चाहिए।
  11. सोमवती अमावस्या के दिन पिंडदान करने से घर और मन में शांति का वास होता है। कार्यक्षेत्र में भी फायदा मिलता है।
  12. यह मान्यता है कि इस दिन पितरों को जल देने (अर्पित) से उन्हें तृप्ति मिलती है।
  13. सोमवती अमावस्या पर पीपल की पूजा अर्चना करके पितरों को भी प्रसन्न किया जाता है जिससे घर में अन्न धन की कोई कमी नहीं रहती है।

अमावस्या पर क्या नहीं करें?

  1. तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज और मांसाहार से दूर रहें।
  2. अमावस्या की रात शराब का  सेवन न करें।
  3. पति-पत्नी एक बिस्तर पर न सोएं।
  4. अमावस्या की रात में घर में लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि उस वक्त पितर भी घर में मौजूद रहते हैं। घर का क्लेश देखकर उन्हें दुख होता है और वे बिना आशीर्वाद दिए ही दुखी होकर वापस लौट जाते हैं।

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