Ganesh Chaturthi is a ten-day festival celebrated to mark the Lord Ganesha’s birthday. 10 दिन तक चलने वाला यह उत्सव गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है| गणेश चतुर्थी के दिन भक्त प्यारे बप्पा (Ganpati Bappa) की मूर्ति को घर लाकर उनका सत्कार करते हैं, फिर 10वें दिन यानी कि अनंत चतर्दशी (Ananta Chaturdashi) को विसर्जन के साथ मंगलमूर्ति भगवान गणेश को विदाई जाती है| The Ganesha idols are taken out and immersed in water on Anant Chaturdasi. साथ ही उनसे अगले बरस जल्दी आने का वादा भी लिया जाता है|
Ganesh Chaturthi के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणपति की मूर्ति की स्थापना की जाती है और पूरे 10 दिनों तक उनका जन्म उत्सव मनाया जाता है| गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के दिन ही बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश का जन्म हुआ था| Ganesha is known by 108 different names and is the god of arts and sciences and the deva of wisdom. He is worshipped and remembered at the beginning of any rituals, पूजा पाठ and ceremonies as he’s considered to be the विघ्नहर्ता – ‘God to remove the obstacles’. He is widely and dearly referred to as Ganapati, Vinayaka.
विघ्न हरण, मंगल करण, गणनायक गणराज |
रिद्धि सिद्धि सहित पधारजो, म्हारा पूरण करजो काज ||
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गणेश चतुर्थी का महत्व | Significance of Ganesh Chaturthi
हिन्दू धर्म में भगवान गणेश का विशेष स्थान है| कोई भी पूजा, हवन या मांगलिक कार्य उनकी स्तुति के बिना अधूरा है| हिन्दुओं में गणेश वंदना के साथ ही किसी नए काम की शुरुआत होती है, यही वजह है कि गणेश चतुर्थी यानी कि भगवान गणेश के जन्मदिवस को देश भर में पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ मनाया जाता है.
गणेश चतुर्थी का सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व ही नहीं है बल्कि यह राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक है| छत्रपति शिवाजी महाराज ने तो अपने शासन काल में राष्ट्रीय संस्कृति और एकता को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक रूप से गणेश पूजन शुरू किया था| लोकमान्य तिलक ने 1857 की असफल क्रांति के बाद देश को एक सूत्र में बांधने के मकसद से इस पर्व को सामाजिक और राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाए जाने की परंपरा फिर से शुरू की| 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव ने अंग्रेजी शासन की जड़ों को हिलाने का काम बखूबी किया|
Ganesh Chaturthi Celebration
People celebrate this beautiful ten days festival with full enthusiasm and starts with the installation of beautifully
crafted statues of Lord Ganesha in homes and at public places. The installation starts with a ritual known as प्राण प्रतिष्ठा (Prana Pratishtha) and it is performed to invoke the power of deity into the idol (statue), to follow the ritual there are 16 steps known as षोडशोपचार पूजा (Shodashopachara Puja), this puja is performed to splendid the statue. This puja contains various offerings to Lord Ganesha that includes sweets, coconuts, rice, jaggery, flowers and coins. While performing this puja one has to be careful about the auspicious time ‘Shubh Muhurat‘ of the day.
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 12 सितंबर 2018 को शाम 4 बजकर 07 मिनट.
गणेश चतुर्थी तिथि समाप्त: 13 सितंबर 2018 को दोपहर 02 बजकर 51 मिनट.
भगवान गणेश का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए इनकी पूजा दोपहर में होती है. वैसे गणेश जी का पूजन प्रातःकाल, दोपहर और शाम में से किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन चतुर्थी के दिन मध्याह्न 12 बजे का समय गणेश-पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. मध्याह्न पूजा का समय गणेश-चतुर्थी पूजा मुहूर्त के नाम से ही जाना जाता है|
गणपति की स्थापना और पूजा का समय: 13 सितंबर की सुबह 11 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 35 मिनट तक.
अवधि: 2 घंटे 26 मिनट
13 सितंबर को चंद्रमा नहीं देखने का समय: सुबह 09 बजकर 33 मिनट से रात 09 बजकर 23 मिनट तक.
अवधि: 11 घंटे 50 मिनट.
धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से किसी भी शुभ कार्य में कोई विघ्न, बाधा नहीं आती है। इसलिए हर कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा करने का विधान है।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
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गणेश स्थापना विधि – ऐसे करें गणपति की स्थापना?
गणपति को घर में स्थापित करने से पहले पूजा स्थल की सफाई करें। गणपति की स्थापना करने से पहले स्नान करने के बाद नए या साफ धुले हुए बिना कटे-फटे वस्त्र पहनने चाहिए । इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं।
सबसे पहले घी का दीपक जलाएं, इसके बाद पूजा का संकल्प लें। फिर गणेश जी का ध्यान करने के बाद उनका आह्वन करें।
फिर एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर अक्षत (चावल), या गेहूं, मूंग, ज्वार रखें और गणपति को स्थापित करें। आप चाहे तो बाजार से खरीदकर या अपने हाथ से बनी गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित कर सकते हैं। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्वरूप एक-एक सुपारी रखें।
गणेश स्थापना – ध्यान रखें
- आसन कटा-फटा नहीं होना चाहिए. साथ ही पत्थर के आसन का इस्तेमाल न करें।
- जल से भरा हुआ कलश गणेश जी के बाएं रखें।
- चावल या गेहूं के ऊपर स्थापित करें।
- कलश पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें।
- गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखें।
- गणेश जी का जन्म मध्याह्न में हुआ था, इसलिए मध्याह्न में ही प्रतिष्ठापित करें।
- 10 दिन तक नियमित समय पर आरती करें।
- पूजा का समय नियत रखें। जाप माला की संख्या भी नियत ही रखें।
- गणेश जी के सम्मुख बैठकर उनसे संवाद करें। मंत्रों का जाप करें। अपने कष्ट कहें।
- शिव परिवार की आराधना अवश्य करें यानी भगवान शंकर और पार्वती जी का ध्यान अवश्य करें।
गणेश चतुर्थी की पूजन विधि
गणपति की स्थापना के बाद इस तरह पूजन करें:
– सबसे पहले घी का दीपक जलाएं, इसके बाद पूजा का संकल्प लें ।
– इसके बाद गणपति को दूर्वा या पान के पत्ते की सहायता से गणेश को स्नान कराएं । सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्नान कराएं।
– अब गणेश जी को पीले वस्त्र चढ़ाएं, अगर वस्त्र नहीं हैं तो आप उन्हें मोली को वस्त्र मानकर अर्पित करें।
– इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर (कुमकुम), चंदन, अक्षत लगाएं, फूल चढ़ाएं और फूलों की माला अर्पित करें और आभूषण से अलंकृत करें।
– अब बप्पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं।
– अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें, हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का इस्तेमाल करें।
– अब नैवेद्य का भोग लगाएं. नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल शामिल हैं। गणेश जी को मोदक और बूंदी के लड्डू अति प्रिय हैं उनका भोग अवश्य लगाएं।
– पान लौंग इलायची और द्रव्य चढ़ाएं, उसके पश्चात् ऋतु फल अर्पित करें।
– इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिणा प्रदान करें।
– अब अपने परिवार के साथ गणपति की और शंकर जी आरती करें। गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है।
– इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करें।
– अब गणपति की परिक्रमा करें. ध्यान रहे कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है।
– इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए माफी मांगें।
– पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।
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भगवान गणेश की जन्म कथा
भगवान गणेश के जन्म को लेकर कथा प्रचलित है कि देवी पार्वती ने एक बार शिव के गण नंदी के द्वारा उनकी आज्ञा पालन में त्रुटि के कारण अपने शरीर के मैल और उबटन से एक बालक का निर्माण कर उसमें प्राण डाल दिए और कहा, “तुम मेरे पुत्र हो. तुम मेरी ही आज्ञा का पालन करना और किसी की नहीं। हे पुत्र! मैं स्नान के लिए भोगावती नदी जा रही हूं, कोई भी अंदर न आने पाए।” कुछ देर बाद वहां भगवान शंकर आए और पार्वती के भवन में जाने लगे। यह देखकर उस बालक ने उन्हें रोकना चाहा, बालक हठ देख कर भगवान शंकर क्रोधित हो गए। इसे उन्होंने अपना अपमान समझा और अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर भीतर चले गए।
स्वामी की नाराजगी का कारण पार्वती समझ नहीं पाईं। उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर भगवान शिव को आमंत्रित किया। तब दूसरी थाली देख शिव ने आश्चर्यचकित होकर पूछा, “यह किसके लिए है?” पार्वती बोलीं, “यह मेरे पुत्र गणेश के लिए है जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है, क्या आपने आते वक्त उसे नहीं देखा?”
यह बात सुनकर शिव बहुत हैरान हुए और पार्वती को सारा वृत्तांत कह सुनाया। यह सुन देवी पार्वती क्रोधित हो विलाप करने लगीं। उनकी क्रोधाग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब सभी देवताओं ने मिलकर उनकी स्तुति की और बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा। तब पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव के कहने पर विष्णु जी एक हाथी (गज) के बच्चे का सिर काट कर लाए थे और भगवान शिव ने वह सिर उन्होंने उस बालक के धड़ पर रख कर उसे जीवित किया था। भगवान शंकर व अन्य देवताओं ने उस गजमुख बालक को अनेक आशीर्वाद दिए। देवताओं ने गणेश, गणपति, विनायक, विघ्नहरता, प्रथम पूज्य आदि कई नामों से उस बालक की स्तुति की.
चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति कलंक का भागी बनता है
There is the myth about Ganesh chaturthi which tells that on the occasion of Ganesh chaturthi anyone who sees the moon will be accused of doing something wrong. इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति कलंक का भागी बनता है।
In the very famous legend related to the basis of this myth. Lord Ganesha, the God of good fortune, wisdom, intelligence and prosperity, on one of his birthday, ate 21 types of sweets including laddus, modaks and sweet porridge made by his mother, Goddess Parvati. He, after having sweets, went for a nightly round on his vehicle rat but suddenly a snake came in front of the rat and rat got scared. After this, the rat stumbled and Lord Ganesha fell down and his stomach got burst and all of the sweets came out from his pot-belly.
Then quickly Lord Ganesha put all the sweets inside his belly and tied that snake around his belly as a belt. At that time, he heard the voice of laughing and when he looked up, he saw that the Chandra Devta was mocking at him. Seeing this, he became very angry and broke off one of his tusks and threw it at the moon. Also, he cursed the moon saying, that whoever will see the moon will be blamed of a wrongdoing.
परंतु चंद्रमा के क्षमा याचना करने पर भगवान उन्हें श्राप मुक्त करते हुए कहते हैं कि वर्ष भर में एक दिन भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को चंद्र दर्शन से कलंक लगने का विधान बना रहेगा। Even today the myth has survived and people avoid looking at the moon on the occasion of Ganesh Chaturthi.
चंद्र को देख ही लिया तो इसी कृष्ण-स्यमंतक कथा को पढ़ने या विद्वतजनों से सुनने पर भगवान गणेश क्षमा कर देते हैं। इसके साथ ही हर दूज का चांद देखना भी जरूरी है, कलंक से बचने के लिए। The another solution to keep the troubles away and that is, by reciting or listening to the God Ganesha name and Mantras.
चतुर्थी व्रत से सभी संकट-विघ्न दूर होते हैं. चतुर्थी का संयोग गणेश जी की उपासना में अत्यंत शुभ एवं सिद्धिदायक होता है. चतुर्थी का माहात्म्य यह है कि इस दिन विधिवत् व्रत करने से श्रीगणेश तत्काल प्रसन्न हो जाते हैं. चतुर्थी का व्रत विधिवत करने से व्रत का सम्पूर्ण पुण्य प्राप्त हो जाता है.
मूषिकवाहन मोदकहस्त
चामरकर्ण विलम्बितसूत्र ।
वामनरूप महेस्वरपुत्र
विघ्नविनायक पाद नमस्ते ॥
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भगवान श्री गणेश की कृपा, बनी रहे आप हर दम |
हर कार्य में सफलता मिले, जीवन में न आये कोई गम ||
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं|
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” बोलो गणपति बाप्पा मोर्या “




